संत कबीर की ‘दान’ पर कहानी : Sant Kabir Story in Hindi

March 28, 2020

दान का पाप (Sant Kabir Ki Story in Hindi)

kabir das ki photo

कबीर दास जी के जीवन का एक प्रसंग है। संत कबीर अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए कपड़े बुना करते थे। एक बार दोपहर के समय जब कबीर दास जी कपड़े बुनने में लीन थे तभी उनके द्वार पर एक भिखारी आया। भिखारी बड़ा ही भूखा प्यासा मालूम होता था।

भिखारी को देखकर कबीर दास जी को बड़ी दया आयी और उन्होंने उसे ठंडा पानी पिलाया। भिखारी कई दिन से भूखा था इसलिए उसने कबीर जी से कुछ खाने को माँगा। उस समय कबीर दास जी के पास खाने की कोई सामग्री नहीं थी।

कुछ सोचकर कबीर दास जी ने कहा कि मित्र मेरे पास तुमको खिलाने को भोजन तो नहीं है, तुम मेरा ये ऊन का गोला ले जाओ और इसे बेचकर अपने लिए भोजन का इंतजाम कर लेना।

भिखारी ऊन का गोला लेकर चला गया। रास्ते में उसे एक तालाब दिखा, भिखारी ने ऊन का गोला निकाल कर उसका एक जाल बनाया और तालाब से मछली पकड़ने की कोशिश करने लगा। संयोग से उस तालाब काफी सारी मछलियां थीं अतः उसके जाल में कई मछलियां फंस गयी। अब तो वो भिखारी शाम तक मछली पकड़ता रहा।

काफी मछली इकट्ठी हो जाने पर उन्हें बाजार में बेच आया। अब वो भिखारी रोजाना तालाब में जाता और ऊन के जाल से खूब मछलियां पकड़ता। धीरे धीरे उसने मछली पकड़ने को ही अपना धंधा बना लिया। अब वो कई अच्छे किस्म के जाल भी खरीद लाया। ऐसा करते करते एक दिन वो काफी अमीर व्यक्ति बन गया।

एक दिन उस भिखारी ने सोचा कि क्यों ना संत कबीर से मिलने जाया जाये और उनका धन्यवाद दिया जाये क्योंकि आज मैं उन्हीं की वजह से अमीर बन पाया हूँ।

जब वो भिखारी कबीर दास जी के पास गया तो अपने साथ सोने, चाँदी और रत्न लेकर आया। सभी सोना, चाँदी और रत्न उसने कबीर जी के चरणों में लाकर रख दिए लेकिन संत कबीर उस भिखारी को पहचान ना पाये। तब उस भिखारी ने सारी पुरानी बात याद दिलाई कि आपके ऊन के गोले की वजह से मैं आज इतना अमीर हो पाया।

उसकी पूरी बात सुनकर संत कबीर बड़े दुःखी हुए और बोले कि तुमने इतनी सारी मछलियों से उनका जीवन छीनकर पाप किया है और क्योंकि ये सब मेरे कारण हुआ है इसलिए तुम्हारे आधे पाप का भागीदार मैं भी बन गया हूँ।

संत कबीर से उस भिखारी द्वारा दिया गया सोना, चांदी और रत्न को वापस लौटा दिया और उस भिखारी को भी पुण्य कर्म करके पश्चाताप करने का उपदेश दिया।

मित्रों हमें असहाय लोगों की मदद करनी चाहिये। दान करना सबसे बड़ा पुण्य है लेकिन ये पुण्य तभी मान्य है जब आपका दान अच्छे कामों में इस्तेमाल हो। बुरे कामों के लिए दिया गया दान भी पाप के समान होता है और दान देने वाला भी उस पाप का भागीदार बनता है।

दान दें लेकिन सोच समझकर ताकि आपके दान का दुरूपयोग ना हो……धन्यवाद!!!

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