परिवार में आपसी कलह और लड़ाइयों का सबसे बड़ा कारण

पारिवारिक कलह और झगड़े पर चिंतन

आज के समय में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जिसमें लड़ाई झगड़े ना होते हों| हर परिवार में क्लेश या लड़ाईयां बहुत ही सामान्य चीजें हो गई हैं| परिवार के बड़े बुजुर्ग हमेशा इस बात से परेशान रहते हैं कि परिवार के सभी सदस्य आपस में लड़ते क्यों हैं? एक दूसरे के साथ भाईचारे से क्यों नहीं रहते? एक ही परिवार के लोग आपस में एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों हो बैठे हैं? क्यों एक भाई दूसरे भाई को देखकर जलना शुरु कर देता है? क्यों परिवार का एक सदस्य दूसरे सदस्य को देखकर ईर्ष्या करने लगता है? आखिर क्या है परिवार में इन सब लड़ाईयों का सबसे बड़ा कारण?

Pariwar me ladai

पारिवारिक झगड़ों का सबसे बड़ा कारण

परिवार में लड़ाई और झगड़ों के होने का सबसे बड़ा कारण है – “हमारे संस्कारों का विलुप्त होना”

जैसे जैसे समाज में टेक्नालॉजी और पैसा बढ़ता जा रहा है, उसी स्पीड से लोगों में संस्कार की भावना कम होती जा रही है| पुराने समय में लोग एक दूसरे का आदर किया करते थे, बेटे के मन में पिता के लिए सम्मान होता था| भगवान राम पिता के एक बार ही कहने पर वनवास के लिए चले गए थे|

आपस में भाई-भाई एक दूसरे से प्रेम किया करते थे लेकिन आज संस्कार और प्रेम की भावना लोगों में खत्म हो चुकी है| जरा आंखें बंद करके अपने माता-पिता के बारे में सोचिए, ये वह लोग हैं जिन्होंने आपके लिए हर कष्ट को सहा है, हर परेशानियों को हंसकर सहा है, आपके लिए सुख सुविधाएं इकट्ठी करने के लिए इन्होंने अपना समय, अपनी पूंजी, अपना स्वास्थ्य, हर चीज को कुर्बान किया है, ताकि आप लोग खुशी से रह सकें|

लेकिन जब बेटे अपने माता-पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ देते हैं या उनसे अलग हो जाते हैं तो उन बेटों को जरा भी दुःख नहीं होता, अपने ही माता पिता से लगाव नहीं होता क्यूंकि वो माता-पिता के सभी संघर्षों भूल जाते हैं….

यह संस्कारों की कमी है…

आप अपने संस्कारों को छोड़ने जा रहे हैं| जब एक भाई दूसरे भाई से अलग होता है, तो उसे दुख नहीं होता| यह वाकई बड़े दुख की बात है कि हम अपने सगे-संबंधियों से इतनी आसानी से बिछड़ जाते हैं, हम खून के रिश्ते को इतनी आसानी से तोड़ देते हैं और हमें जरा भी दुख नहीं होता| ये संस्कारों की कमी है…

हम अपने माता-पिता को रुला देते हैं, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर लेते हैं, ये संस्कारों की कमी है| भरत के मन में अपने बड़े भाई श्री राम के लिए इतना सम्मान और प्रेम था कि वह खुद राजगद्दी पर नहीं बैठे और भगवान राम की चरण पादुकाओं को सिंघासन पर रखा क्यूंकि वह राज्य श्री राम को दिया जाना था|

जिस दिन आपको अपने भाई और बहनों से बिछड़ने में दुख होने लगेगा, छोटे भाई को दुःख होने पर बड़े भाई को उसका दुःख महसूस होने लगेगा,उस दिन आप सभी आपस में भाईचारे से सुखी रह सकोगे|

आज के परिवारों की दशा

लोगों की एक दूसरे से मानसिक दूरियां बढ़ती जा रही हैं, एक ही घर में रहते हैं, लेकिन फिर भी एक दूसरे से बहुत दूर हैं| लोग एक दूसरे को समझने के लिए तैयार ही नहीं हैं|

आपको पता है जानवर और इंसानों में क्या फर्क है? जानवरों में संस्कार नहीं होते| वह केवल खाने पर ध्यान देते हैं, हम इंसानों में संस्कार होते हैं.. हमारे अंदर भावनाएं हैं, हम सोच पाते हैं, हम अच्छाई और बुराई में फर्क करना जानते हैं|

अगर आपका सगा भाई परेशानी में है तो आपको भी परेशानी महसूस होनी चाहिए| अगर आपको महसूस हो रही है तो यह प्रेम है, यह आपके संस्कार हैं और अगर आपका भाई परेशान है और आपको कोई परेशानी नहीं हो रही, आप प्रसन्न हैं तो इसका अर्थ है कि आप के संस्कार मर चुके हैं, आपकी भावनाएं मर चुकी हैं|

जिस दिन आप अपने मां-बाप से तेज चिल्ला कर बात कर लेंगे या जिस दिन आप अपने मां-बाप से लड़ना शुरू कर देंगे, सोच लेना उस दिन से आपके संस्कार मर चुके हैं|

बच्चों को शुरुआत से दें संस्कार

अगर आपके अंदर संस्कार होते तो आप अपने मुंह से उन लोगों के लिए एक शब्द नहीं निकाल पाते, जिन्होंने आपके लिए अपने जीवन में न जाने कितनी कठिनाइयां सही हैं| आपकी अच्छाई के लिए, आप को सुखी रखने के लिए, ना जाने अपनी कितनी सारी जरूरतों को कुर्बान किया है|

मैं सभी लोगों से यह निवेदन करता हूं कि अपने बच्चों को पैसा दें या ना दें… उनको कार दें या ना दें लेकिन उनको संस्कार जरूर दें| आपके बच्चे को कार से ज्यादा संस्कार की ज्यादा जरूरत है|

बच्चों को संस्कार दो, और उनको बताओ कि भाई और बहन या भाई-भाई आपस में रहने से कितनी चीजें सरल हो जाती हैं| बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, उनको परिवार का महत्व बताएं कि परिवार का हर एक सदस्य कितना महत्वपूर्ण है| आपस में प्रेम करना सिखायें|

एक अच्छे समाज की शुरुआत होती है एक आदर्श परिवार से….. आइये एक अच्छे समाज की स्थापना में अपना योगदान दें|

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6 Comments

  1. आपका Articel बहुत ही अच्छा लगा।।आपकी बात
    बिल्कुल सही है।

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