Baat Pate Ki ~ नौकरी या बिजनेस क्या है बेहतर ?

बात पते की

बड़े बाजार में माखनचंद की एक समोसे की दुकान थी। माखनचंद बड़े सीधे और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनका एक बेटा भी था, दुकान के एक कोने पर माखनचंद समोसे तलते रहते और दूसरे कोने पर उनका बेटा पैसे लेने देने का हिसाब करता था।

samose-ki-dukanदुकान के सामने एक बड़ी सॉफ्टवेर कंपनी थी। कंपनी में दोपहर को जब लंच का समय होता तो कंपनी के लोग अक्सर माखनचंद की दुकान पर समोसे खाने आते थे। हुआ यूँ कि एक दिन कंपनी के मैनेजर महेन्द्र बाबू समोसे खाने आये।

खाते खाते महेन्द्र बाबू को कुछ मजाक सुझा और वो माखनचंद से बोले – भाई समोसे तो आप बहुत ही बढ़िया बनाते हो और दुकान भी आपकी काफी अच्छी चलती है लेकिन तुम्हें नहीं लगता कि ये समोसे बेचकर तुम अपना कीमती वक्त खराब कर रहे हो।

अगर थोड़ा और पढ़ लेते, थोड़ी और मेहनत करते तो मेरी तरह कहीं मैनेजर होते और ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे होते। माखनचंद बेचारा सरल स्वभाव का आदमी था वो बोला – मैनेजर साहब आपके और मेरे इस काम में बहुत बड़ा फर्क है।

आगे माखनचंद बोले – आपको याद होगा आज से करीब 10 साल पहले आप इस कंपनी में एक जूनियर के पद पर आये थे। उन दिनों आपकी पगार 10 हजार रूपये महीना थी। मेरे पास तब दुकान तो थी नहीं तो मैं उन दिनों टोकरी में समोसे बेचा करता था और मेरी कमाई करीब 1 हजार रुपये महीना थी।

आज 10 साल बाद आप मैनेजर बन गए और आपकी पगार है 50 हजार। मेरी अब अपनी दुकान है और मेरी कमाई है 2 लाख प्रति माह। लेकिन चलिए पैसा ही सब कुछ नहीं होता। आपने अपने जीवन में जो मेहनत की है वो आपके बेटे के काम नहीं आएगी वो आपके मालिक के बच्चों के काम आएगी।

जब मेरा बेटा बड़ा होगा तो वो मेरी दुकान को संभालेगा और उसे कोई संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। मैंने मेहनत करके अपनी दुकान को बड़ा बनाया है और ये सब मेरे बेटे को मिलेगा वो आराम से मेरा बिजनिस आगे बढ़ाएगा।

लेकिन आप तो अपने बेटे को सीधा मैनेजर पद पर नहीं बिठा सकते। आपके बेटे तो फिर से वही जूनियर पद से मेहनत करनी पड़ेगी जो आपने की है, आपकी मेहनत का उसे ज्यादा फायदा नहीं मिल पायेगा।

झेंपे से महेन्द्र बाबू बिना कुछ बोले समोसे के पैसे देकर वापस कंपनी रवाना हो लिए।

दोस्तों इस कहानी में नौकरी और बिजनिस की एक तर्कसंगत तुलना की गयी है। हम ये नहीं कहते कि नौकरी करना बुरा है, दरअसल नौकरी भी अच्छी है और अच्छाई बुराई तो हर काम में होती है लेकिन बिजनिस नौकरी से कैसे उत्तम है ये बात इस कहानी में बताई गयी है।

ये कहानी बड़ी ही मनोरंजक है जो हर उम्र के लोगों को पसंद आएगी। तो चलिए कहानी पढ़ने के बाद नीचे कमेंट बॉक्स में जाइये और अपना कीमती कमेंट हमें लिख कर भेजिए। आपके कमेंट हमें और अच्छा लिखने को उत्साहित करते हैं।

धन्यवाद!!!

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59 Comments

  1. अपना बिज़नस करने से हम मालिक बनते है और नौकरी शब्द का जन्म उस काम से है जो एक नौकर करता है. आत्म निर्भर बन्ने के लिए पैसे कमाना जरूरी है लेकिन एक बिज़नस से नौकरी का जन्म होता है. नौकरी बिज़नस का एक हिस्सा है. अपनी क्षमता के अनुसार आप बिज़नस या नौकरी करना तय करते है. आपकी यह कहानी मुझे बहुत प्रेरक लगी. धन्यवाद् पवन जी.

    Raj Dixit
    website: Hindi-Quotes.in

  2. व्यापार और नौकरी के अपने अपने माप-दंड है। एक बिज़नस को चलाने के लिए प्रतिस्पर्धी बाज़ार से मुक़ाबला करना पड़ेगा। और नौकरी मे टीके रहने के लिए भी परिश्रम आवश्यक होगा। दोनों ही क्षेत्रो में लगन, और महेनत कर के ही सफल हुआ जा सकता है।

    1. Ji paresh ji.. aapki bat bilkul sahi hai vaise is story ka meaning job wale logo ko demotivate karna nahi hai balki kahani me ek tulnatmak baat btayi gyi hai and aapki bat se me 100% sahmat hu

  3. इस कहानी के माध्यम से आप ने बहुत ही सरलता से समझाया है की नौकरी और बिज़नस में क्या फर्क है ! बहुत अच्छी लगी यह कहानी ..

  4. ये कहानी हमारे दिल को छू गई…
    क्योंकि हम एक बिजनेस मैन के घर से है…Thanks

  5. Aaj ke samay me log naukari ke lie APNA kimati SAmay nast Kar Rahe hai.
    Competition k bahane youth urja ka durupyog Kiya ja Raha h.
    Mai manta hu ki education jaruri hai lekin is tarah se nhi jaisa aaj ho raha hai
    Kya aap mujhase sahamat hai?

  6. सर आपकी ये कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी
    आशा करता हु की आप इस तरह की कहानी और लिखेगे
    धन्यवाद्

  7. पवन जी , सबसे पहले ब्लॉग्गिंग जगत में तीन वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए बधाई | व्यापार और नौकरी दोनों का अपना एक अलग महत्व है | मेरा अनुभव देखा जाए तो हर इंसान को जीवन में नौकरी अवश्य करनी चाहिए चाहे उनके आपस पुश्तैनी धंधा ही क्यों ना हो | नौकरी से हमको ये सीखने को मिलता है किस तरह हम अपने से उच्च पद के लोगो के साथ , साथियों के साथ और अपने से नीचे वालों के साथ कैसे सामंजस्य बिठाते है | नौकरी से इंसान मानसिक रूप से इतना सुदृढ़ होता है जिससे जीवन की हर बाधा को पार कर लेता है | कुछ वर्ष नौकरी करने के बाद आप अनुभव के आधार पर नौकरी करे तो जीवन में कभी असफल नही होंगे |

    1. Ji bilkul raj kumar ji,, kahani ka aim to sirf ek simple comparison hai but agar log naukari nahi karenge to business bi nahi chal pygea isliye dono hi chize apni jagah sahi h and dono ka advantage and disadvantage hai… ye bat mene last paragraph me bi khi taki job wale logo ko koi problem na ho..

    2. RAJKUMAR g, aap n sahi kaha h, agar nokri achi nhi hoti to fiir hr koi nokri k lea hi mehnut que kr rha h, business k pichay too hr koi nhi bhagta, or agar hum private ya govt. koi b job kr k dekh ley to hum ko duniya k baray m pta chal jaega ki job or business m kya difference hota h, fiir hum apnay andur jo b talent h vo use kr saktay h.

  8. Ratan Tata said if you can leave the job, then leave. I am also an entrepreneur and proud myself. Because we giving jobs to others. Every business does not start for earn money but ultimate in the final we achieve big.

  9. APKE IS KAHANIYO KA JO SANKALAN HAI BADA HI LAJWAB HAI . MAI 1ST TIME APKA YE KAHANI PADHA RAHA HU , AISA LAG RAHA HAI JAISE KOI PARENTS APNE BACHHE KE LIYE RASTA DIKHATA HAI USI TARAH APKI YE KAHANIYA HAI JO JINDAGI KA AHAM RAST DIKHATA HAI APKA JITNA BHI THANKS BOLU WAH BAHUT HI KAM HOGA . . . . . . . . . . . . . . .

  10. your story is very nice insan ko agar aage badana hai to wo bussiness say apne sapne poore kar sakta hai service may to insan do woqt ki rotti hi kama pata hai

  11. yes sir You are right….
    Bade se bada bzns paise se nhi balki 1 choti dimag se chalta hai……Do bzns and life with in be happy

  12. “Naukari Insan ko Bhot kamzor Kar deti hai.Naukari Ghar ke logo ko ek dusre se door kar deti h.Naukari insan ko samaj se alag kar deti h.Naukari kisi ke dukh sukh mai shamil nhi hone deti..Jab Ham chotte hote h to Hamare papa Hamri zindagi ko behtar banane ke liye Apni puri zindagi bahar khatam kar dete h.Or Jab Ham jawan ho jate h or woh burhe to Ham achchi zindagi ke liye bhar or wo ghar aa jate h.Yani Baap beta kabhi sath nhi rhte.
    Naukari Aesi soch bna deti h ki agar kisi ki shadi ho ya kisi ki death bhi ho to sirf sunday ko hi take ham ja sake.
    Arif Rehman
    (Civil Structural Design Engineer,MNC)

  13. Ye story hame apna sinior sir sunaya karte the.par is story ko padhane ke bad mai bahut khush hu isse bahut kuch jankari bhi mili .ye story mere life me nokri ko hamesha ke liye alvida kah di.
    So thank you

    1. business is must beter but who is the best business if you r not so call that

      me aapko btaunga ki konsa business best he because i am doing business

      my contact no. :- 917906135418

  14. Mai ek company me worker hoo I t I karne ke baad se Mai tollbros company joine kuya but na koi aage badne ka mouka Mila na sailly bdi aapki story padne ke baad Mai promise Karta hoo koi apna business kholuga
    Thanks to you

  15. MAI BHI BUSSINES KARNA CHAHATA HU BUT MERE PASS KOI DUKKAN NAHI HAI. MAI BUSSINESS HI KARNA CHAHATA HU. KOI MUJHE SUPPORT KARE.

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