जीवन का सत्य – जियो तो हर पल ऐसे जियो जैसे कि आखिरी हो

Jivan Ka Satya Truth Of Life
Jivan Ka Satya Truth Of Life

रमेश की दिल्ली में एक छोटी सी दुकान थी। उसी दुकान में रमेश साइबर कैफे चलाता था। रमेश की शादी को अब 10 साल पूरे हो चुके थे, साथ ही एक बच्चा भी था लेकिन जिंदगी में अब पहले जैसी रौनक नहीं थी। सुबह उठो, बस लग जाओ पैसे कमाने में। जिंदगी अब बहुत व्यस्त हो चली थी।

एक दिन रमेश जब दुकान पर गया तो सोचा कि आज मैं शाम को थोड़ा जल्दी घर जाऊँगा। रोजाना रमेश 10 बजे दुकान बंद करता था लेकिन आज 7 बजे ही दुकान बंद करके चल दिया। मन में सोच रहा था कि आज पत्नी से खूब बातें करूँगा फिर खाना खाने बाहर जायेंगे थोड़ा मन भी बहल जायेगा।

रमेश जब घर पहुँचा तो श्रीमति उनको देखकर बड़ी खुश हुईं। उस समय श्रीमती टीवी पर एक सीरियल देख रही थीं। रमेश ने सोचा कि जब तक ये सीरियल खत्म हो, क्यों ना कम्प्यूटर पर मेल चेक कर लिए जाएँ। बस यही सोचकर रमेश कम्प्यूटर खोल कर बैठ गया, थोड़ी ही देर में श्रीमति ने टेबल पर ही चाय भी ला दी। रमेश चाय पीता हुआ दुकान का कुछ काम करने लगा। मन में बहुत ख़ुशी थी कि अभी थोड़ी देर में बीवी से बात करूँगा और खाना खाने बाहर जायेंगे।

टेबल पर काम करते करते समय का पता ही नहीं चला और 8 से 11 बज गए। श्रीमती ने सोचा कि पतिदेव भूखे होंगे तो टेबल पर ही खाना भी लगा दिया। रमेश ने जब घड़ी में 11 बजते देखा तो सोचा चलो खाना खा लेते हैं फिर थोड़ी देर नीचे पार्क में घूमने चलेंगे।

खाना खाते रहे इसी बीच एक मजेदार सीरियल आने लगा बस रमेश थोड़ी देर सीरियल देखने लगा और सीरियल में ऐसा खोया कि वहीँ सोफे पर ही सो गया। अचानक थोड़ी देर में आँखें खुलीं तो आधी रात हो चुकी थी। श्रीमती भी बैडरूम में आराम से सो चुकी थीं।

मन में बहुत ज्यादा अफ़सोस हुआ कि मैं क्या सोच के आया था कि आज गपशप करेंगे और खाना खाने बाहर चलेंगे लेकिन समय ही नहीं मिला।

दोस्तों हमारी भागदौड़ भरी जिंदगी भी कुछ ऐसी ही हो चुकी है। हम सुबह उठते हैं और बस लग जाते हैं जिंदगी की दौड़ में, थोड़े पैसे कमाने हैं, भविष्य को बेहतर बनाना है। वो भविष्य जो कभी आता ही नहीं है, हम आज भी वर्तमान में जी रहे हैं और कल भी वर्तमान में ही जीएंगे। केवल यही समय हमारे पास है जिसमें हम अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं। ना बीते समय पर आपका अधिकार है और नाही आने वाले समय पर लेकिन वर्तमान पर आपका पूरा अधिकार है। जिंदगी जी भर के जियो यारों, क्या पता कल हो ना हो….

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20 Comments

  1. नमस्कार पवन जी,

    आपकी स्टोरी में कही गई बाते मुझ पर लागु होती है. कई बार ऐसे ही मई प्लानिंग कर लेता हु और टाइम कंप्यूटर या टीवी देखने में निकल जाता है हम जैसा ऑफिस, कंप्यूटर और टीवी के गुलाम हो गए है लाइफ का अधिकतर टाइम इन्ही ३ में जाता है परिवार को समय इनसे बचने के बाद ही दे पते है.
    Thanks

    Raj
    Indiainfobiz

  2. bhagdhor bhari jindgi ho gai hai . lekin majburi bhi hai. hahe bachana hoga Aur privaar ke liye smay nikalna hoga. thanku.
    Deverma verma

  3. jindagi ka picha karte-karte ham ye bhul jate hai ki ham kaisi jindagi jii rahe hai,, aur ek din pata chalta hai ki jindagi hi khatam ho gya,,

  4. Wah kya bat h. Andar se itni praise nikal rha h ki byan nhi kr skte. Bas Itna hi khunga ki padh kar mai soch me pad gya. Maja a gya.
    Thank you.

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