Bachendri Pal Biography in Hindi बछेंद्री पाल, एवरेस्ट छूने वाली प्रथम भारतीय महिला

बछेंद्री पाल दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतेह(30 मई सन 1984) करने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं

Bachendri Pal in Hindi : आज हम बात करेंगे भारत की ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने पहली बार दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतेह कर एक नया इतिहास रच दिया|

यह बात है एक महिला द्वारा एवरेस्ट विजय की, जिसने बुलंद हौसलों और साहस का परिचय देते हुए सर्वप्रथम माउन्ट एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखे और समस्त भारतवासियों का सर गर्व से ऊँचा कर दिया| 30 मई सन 1984 का दिन संपूर्ण भारत एवं औरतों के लिए गौरव और सम्मान का दिन था जब बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर फिर से तिरंगा लहराया। चलिये दोस्तों जानते हैं। बछेंद्री पाल के जीवन के बारे में –

बछेंद्री पाल के जीवन की कहानी –

व्यक्तिगत परिचय –

  • जन्म – 24 मई 1954 (आयु 63) नकुरी उत्तरकाशी ,उत्तराखंड
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • व्यवसाय – इस्पात कंपनी ‘टाटा स्टील’ में कार्यरत, जहाँ चुने हुए लोगो को रोमांचक अभियानों का प्रशिक्षण देती हैं।
  • पुरस्कार – Padma Shri in Sports

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बछेंद्री पाल का शुरूआती सफर (Starting Story) –

उत्तराखंड के नकुरी गांव में जन्मी बछेंद्री पाल ने दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए एवरेस्ट शिखर तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही पर्वत बहुत आकर्षित करते थे जब वह m.a. की पढ़ाई कर रही थी तब उनके मन में पर्वत राज हिमालय की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा जागृत हुई। अपने इस सपने को पूरा करने के उद्देश्य से उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से पर्वतारोहण के प्लस और माइनस पॉइंट सीखें। एवरेस्ट यात्रा से पूर्व उन्होंने पर्वतारोहण संस्थान द्वारा आयोजित प्री एवरेस्ट ट्रेनिंग कैंप एक्सपीडिशन में भी भाग लिया।

सफलता की ओर कदम ( Turning Point ) –

आखिरकार 30 मई सन 1984 को ऐतिहासिक दिन आ गया जिसका सपना बछेंद्री पाल ने बचपन से देखा था। अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उन्होंने पर्वत विजय करके यह सिद्ध कर दिया कि महिला किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है यदि महिला ठान ले तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकती है।

एवरेस्ट विजय अभियान में बछेंद्री पाल को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह साहसिक अभियान बहुत जोखिम भरा था इसमें कितना जोखिम था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्हें 6:30 घंटे तक लगातार चढ़ाई करनी पड़ी। इनकी कठिनाई तब और बढ़ गई जब इनकी एक साथी के पांव में चोट लग गई। उन की गति धीमी हो गई थी तब वह पूरी तेजी से आगे नहीं बढ़ सकती थी। फिर भी हर कठिनाई का साहस और धैर्य से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ती रही अंत में 30 मई सन 1984 को दोपहर 1 बजकर 07 मिनट पर वह एवरेस्ट शिखर पर थी। इन्होंने विश्व के सर्वोत्तम शिखर को जीतने वाली सर्व प्रथम पर्वतारोही भारतीय महिला बनने का अभूतपूर्व गौरव प्राप्त कर लिया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब बछेंद्री पाल जी से यह पूछा गया कि- ” एवरेस्ट पर पहुंचकर आपको कैसा लगा ?
तो उन्होंने उत्तर दिया – “मुझे लगा कि मेरा सपना साकार हो गया।

एवरेस्ट फतेह करने वाली पहली महिला बछेंद्री पाल जी एक विश्वविद्यालय में शिक्षिका थी। लेकिन एवरेस्ट की सफलता के बाद भारत की एक आयरन एंड स्टील कंपनी ने उन्हें खेल सहायक की नौकरी के लिए ऑफर दिया उन्होंने यह ऑफर यह सोचकर स्वीकार कर लिया कि यह कंपनी इन्हें और अधिक पर्वत शिखरों पर विजय पाने के प्रयास में सहायता, सुविधा तथा मोटिवेशन प्रदान करती रहेगी। इस समय बछेंद्री पाल जी टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन नामक संस्था में नई पीढ़ी के पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं।

यह भी पढ़ें –
विश्व के प्रथम एवरेस्ट विजेता की कहानी

More Words –

तो दोस्तों यह थी भारत की प्रथम महिला जिसने दुनिया की सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया| दोस्तों अगर आपको कोई सुझाव है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिख भेजें हमें आपकी कमेंट का इंतजार रहेगा और ऐसे ही अपडेट पाने के लिए आप हिंदी सोच को सब्सक्राइब कर सकते हैं और आपको आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूलें..

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