अकबर बीरबल की 18 मशहूर कहानियां ! Akbar Birbal Stories in Hindi

यहाँ आप Short Akbar Birbal Stories in Hindi व Akbar Birbal Ki Kahani और मशहूर अकबर बीरबल की कहानियां पढ़ेंगे| सम्राट अकबर के अजीबोगरीब सवाल और चतुर बीरबल के बुद्धिमान जवाब वाली कहानियां काफी मजेदार हैं और प्रेरक भी इसलिए बच्चों को ये जरूर पढानी चाहिए|

Akbar Birbal Ki Kahaniyan

एकबार बादशाह अकबर की ऊँगली बुरी तरह घायल हो गई| बीरबल ने अकबर को व्याकुल देख उन्हें ढांढस बंधाने हेतु कहा, ‘भगवान जो करता है, अच्छा ही करता है|

इसे सुनकर अकबर को बड़ा गुस्सा आया | उन्होंने फ़ौरन बीरबल को चार दिन के लिए कारागार में डलवा दिया | दूसरे दिन वे शिकार खेलने गए | अकेले होने के कारण उनका शिकार में मन नहीं लगा और रास्ता भटककर वे जंगलियों की बस्ती में जा पहुंचे | जंगलियों ने उन्हें पकड़ लिया और बलि चढाने की तैयारी करने लगे |

ऐसे में बादशाह को बीरबल की कमी बहुत खली | वे समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करूँ ! तभी जंगलियों के पुजारी की नजर अकबर की घायल ऊँगली पर पड़ी तो वह बोला, “इसे छोड़ दो | इसकी बलि नहीं दी जा सकती | ये खंडित हैं |”

अकबर को छोड़ दिया गया| जान बचाकर वे अपनी राजधानी आए और सोचने लगे की बीरबल ने सही कहा था| अगर आज यह कटी ऊँगली न होती तो मैं तो बलि चढ़ गया होता|

उन्होंने महल में आते ही बीरबल को रिहा करवाया और बोले, “तुमने ठीक कहा था बीरबल| ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है |’

“क्या बात है जहाँपनाह ! कल तो आपने मेरी इसी बात से नाराज होकर मुझे कारावास में डलवा दिया था और आज आप ही इस बात को उचित ठहरा रहे है, आखिर बात क्या है ?”

“कल तक हमें इस कथन की सच्चाई पर संदेह था, किन्तु आज विश्वास हो गया है की ईश्वर जो करता है, अच्छा ही करता है |”

मैं कुछ समझ नहीं जहाँपनाह – बीरबल बोले

बादशाह ने बीरबल को पूरी घटना बताई | फिर कहा, “अगर ऊँगली घायल न हुई होती तो आज अकबर मारा जाता, परन्तु एक बात बताओ कि मैंने तुम्हें कारागार में डाला, इसमें तुम्हारा क्या भला हुआ ?”

“जहाँपनाह ! यदि आप मुझे कारागार में न डलवाते तो मैं भी आपके साथ शिकार पर जाता | जाहिर है हम दोनों ही जनगलियों द्वारा पकड़े जाते | तब, आपको तो वह खंडित कहकर छोड़ देते, मगर मैं सही सलामत था, इसलिए मेरी बलि चढ़ा देते| ईश्वर ने मुझे कारागार में डलवाकर अच्छा ही तो किया |” बीरबल का उत्तर जानकर बादशाह बेहद खुश हुए।

दोस्तों ईश्वर जो करता है हमारे लिए अच्छा ही होता है लेकिन हम जाने अनजाने में चीज़ों को गलत सोच लेते हैं। अगर आपके साथ कुछ बुरा हुआ है तो भी इसमें कहीं ना कहीं आपका भला ही है।

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तीन प्रश्न – Akbar Birbal Short Stories in Hindi

अकबर और बीरबल के किस्से काफी प्रसिद्ध हैं। बीरबर मुग़ल सम्राट अकबर एक मंत्री थे। बीरबल अपनी चतुराई और बुद्धिमता से अकबर की सभी समस्या चुटकी बजाते ही हल कर देते थे और इसी वजह से बीरबल अकबर के सबसे ज्यादा विश्वास पात्र भी थे। लेकिन बीरबल की प्रशंसा अकबर के बाकि सभी मंत्रियों को बिल्कुल भी पसंद ना आती।

एक बार अकबर ने किसी बात पर बीरबल की भरे दरबार में जमकर तारीफ की। इस पर सारे दरबारी बीरबल से मन ही मन बड़े गुस्सा हुए। अब वो सभी अकबर से बोले कि महाराज आप बीरबल की कुछ ज्यादा ही प्रशंसा करते हैं जबकि बीरबल उस प्रशंसा के लायक नहीं है।

अगर बीरबल हमारे कुछ सवालों का सही जवाब दे दे तो हम भी मान लेंगे कि बीरबल सबसे बुद्धिमान है। अकबर ने मंत्रियों से पूछा कि क्या हैं आपके प्रश्न ? तो मंत्रियों ने बीरबल के आगे 3 प्रश्न रखे –

1. आकाश में कितने तारे हैं ?
2. धरती का बीच कहाँ है ?
3. इस संसार में कितने आदमी और कितनी औरतें हैं ?

अब अकबर ने तुरंत बीरबल से कहा कि आप जल्दी से जल्दी इन 3 सवालों का जवाब दें नहीं तो तुम्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

पहले सवाल का जवाब देने के लिए बीरबल एक भेड़ को लेकर आये और बोले आकाश में उतने ही तारे हैं जितने भेड़ के शरीर पर बाल, अब मंत्रीगण चाहे तो इस भेड़ के बाल गिन लें

दूसरे सवाल के जवाब में बीरबल ने जमीन पर दो चार लाइन खींची और एक जगह खूंटी गाड़ के बोले – ये है धरती का बीच और अगर यकीन ना हो तो नाप लें

तीसरे सवाल के जवाब में बीरबल बोले – महाराज दुनिया में कितने आदमी और कितनी औरतें हैं ये पता लगाना कठिन है क्योंकि ये हिसाब तो इन मंत्रियों ने बिगाड़ रखा है। ये ना स्त्री हैं और ना ही पुरुष, आप इन्हें मरवा दें तो सही सही हिसाब लग जाये।

यह सुनते ही सारे मंत्री दरबार से खिसक लिए। अब अकबर ने एक बार फिर बीरबल की बुद्धि की खूब प्रशंसा की।

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दुष्ट नाई की दुर्दशा – अकबर बीरबल

सम्राट अकबर बीरबल को सबसे अधिक महत्व देते थे। बीरबल की प्रशंसा को देखकर सारे दरबारी उनसे जल भून जाते थे। सभी मंत्री नए नए तरीकों से बीरबल को नीचा दिखाने की कोशिश करते थे लेकिन बीरबल बड़े ही चतुर एवं बुद्धिमान थे।

एक बार कुछ मंत्रियों ने मिलकर बीरबल से हमेशा के लिए छुटकारा पाने की एक तरकीब निकाली। सभी मंत्री अकबर से नाई के पास गए और उसको बीरबल को मारने की एक योजना बताई और बदले में बहुत सारा धन देने की बात कही। वो नाइ अकबर का सबसे करीबी इंसान था।

अकबर ने जब नाई को बाल कटाने के लिए बुलाया तो नाई ने राजा से कहा – महाराज, आप यहाँ धरती पर ऐशोआराम की जिंदगी जी रहे हैं लेकिन क्या आपने कभी अपने पिता के सुख के बारे में सोचा है ? कभी उनके भी ऐशोआराम की चिंता की है ?

अकबर उसकी बातों पर हंसे और बोले – अरे मेरे पिता तो मर चुके हैं, अब मैं कैसे पता करूँ कि वो सुखी हैं या दुःखी ? नाई बोला – महाराज आप चिंता मत करो मैं एक ऐसे जादूगर को जानता हूँ जो इंसान को स्वर्ग भेज सकता है। आप उस जादूगर से किसी व्यक्ति को स्वर्ग भिजवा कर अपने पिता का हाल चाल पता करा सकते हैं। लेकिन वह व्यक्ति बड़ा ही चतुर और बुद्धिमान होना चाहिए ताकि वह व्यक्ति जादूगर की बातों को आसानी से समझ सके। क्यों ना आप बीरबल को स्वर्ग भेज दें ?

जादूगर बीरबल को कब्रिस्तान लेके जायेगा और वहां आग में बीरबल को बिठाया जायेगा। जादूगर के मन्त्रों की वजह से बीरबल को आग से कोई परेशानी नहीं होगी। जादूगर धुंएँ के रूप में बीरबल को स्वर्ग भेज देगा।

अकबर उसका सुझाव सुनकर बड़ा खुश हुआ और उसने नाई से कहा कि तुरंत सारे इंतजाम करो हम आज ही बीरबल को अपने पिता का समाचार लेने स्वर्ग भेजेंगे। अकबर ने बीरबल को बुलाया और सारी बात बतायी। बीरबल सुनते ही समझ गए कि ये मुझे फंसाने की कोई साजिश है। उन्होंने अकबर से पूछा कि ये अच्छा विचार आपको किसने दिया ? अकबर ने बता दिया की नाई ने ये विचार दिया है।

बीरबल बोले कि महाराज ठीक है, मैं आपके पिता के पास जाने को तैयार हूँ लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं कि मुझे बहुत सारा धन दिया जाते क्योंकि रास्ता बहुत लंबा है मुझे धन की जरूरत पड़ेगी और मुझे एक महीने का समय दिया जाये ताकि मैं अपने परिवार वालों को सुरक्षित जगह बसा सकूँ। अकबर ने भी बीरबल की शर्त स्वीकार कर ली।

अब बीरबल ने जल्दी से अपने कुछ विश्वासपात्र लोगों को बुलाया और कब्रिस्तान के लेकर अपने घर तक जमीन के अंदर ही अंदर एक सुरंग बनवाई। एक महीने में सुरंग तैयार हो गयी। अब बीरबल अकबर के पास गए और बोले कि मैं स्वर्ग जाने को तैयार हूँ।

बीरबल को जादूगर कब्रिस्तान ले गया। अब जादूगर ने मन्त्र पढ़ते हुए जैसे ही आग जलाई गयी। बीरबल तुरंत सुरंग में अंदर घुस गए। सभी लोगों ने सोचा कि बीरबल गायब हो गया वो स्वर्ग चला गया।

इस घटना को कई महीने बीत गए। बीरबल ने कई महीने अपने घर में ही छिप कर गुजारे। अब सारे मंत्री बड़े ही खुश थे उनको लगा था कि अब बीरबल से हमेशा के लिए छुटकारा पा चुके हैं।

एक दिन अचानक बीरबल दरबार में आये। उनकी दाड़ी बहुत ज्यादा बढ़ी हुई थी। सारे मंत्री उन्हें देख के चौंक गए। अकबर अपने चहेते बीरबल को देखकर बहुत ही खुश हुए उन्होंने बीरबल से अपने पिता का हाल पूछा तो बीरबल ने कहा कि महाराज आपके पिता स्वर्ग में बेहद खुश हैं वहां किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। हाँ केवल एक चीज़ की कमी है वहां कोई नाई नहीं है इसलिए आपके पिता के बाल और दाढ़ी काफी बढ़ गयी है और देखिये मेरी भी दाढ़ी कितनी बढ़ गयी है।

अकबर ने तुरंत अपने नाई को बुलाया और कहा हमारे पिताजी को तुम्हारी जरुरत है और तुम मेरे सबसे करीबी हो तो मैं चाहता हूँ कि वो जादूगर तुमको मेरे पिता के पास भेज दे। ताकि तुम मेरे पिता के बाल काट सको।

नाई बेचारा समझ गया कि वह फंस चुका है। अब नाई को जादूगर कब्रिस्तान ले गया, मन्त्र पढ़े और आग जलाई फिर उस आग में नाई को बैठाया बेचारा नाई उसी पल मर गया। अब सारे मंत्री डर के मारे चुप हो गए किसी ने फिर कभी बीरबल पर ऊँगली उठाने की हिम्मत नहीं की।

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कटहल का पेड़ – अकबर बीरबल की कहानी

बीरबल अपना ज्यादातर समय शहंशाह अकबर के शाही बागों में बिताया करते थे| अकबर के शाही बाग़ में कई प्रकार के सुन्दर वृक्ष और सुन्दर दिखने वाले फूल थे| उस बाग़ की देखभाल के लिए मीर नाम का एक माली रखा हुआ था|

बीरबल अक्सर मीर के पास बैठकर पेड़ों और पौधों के बारे में बातें किया करते थे| इस तरह मीर और बीरबल के बीच अच्छी दोस्ती हो गयी थी|

एक सुबह जब बीरबल बाग़ में टहलने गए तो देखा मीर बुरी तरह रो रहा था| बीरबल ने उसके रोने का कारण पूछा तो मीर ने बताया कि उसने अपने जीवनभर की कमाई एक घड़े में भरकर एक कटहल के पेड़ के नीचे दबा दिया था|

लेकिन आज सुबह जब धन निकालने के लिए गड्ढा खोदा तो देखा वहां वो घड़ा है ही नहीं| इस वजह से मीर बुरी तरह परेशान होकर रो रहा था| बीरबल ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा कि मित्र चिंता ना करो तुम्हारा धन वापस मिल जायेगा|

अब बीरबल सोच में पड़ गए कि कौन हो सकता है जो कटहल के पेड़ को खोद सकता है क्यूंकि यदि कोई व्यक्ति यहाँ आता भी है तो फल तोड़कर ही ले जा सकता है पर भला कोई जड़ क्यों खोदेगा ?

बीरबल ने अपना दिमाग लगाया और उन्हें एक विचार आया कि कटहल की जड़ तो केवल दवाई बनाने के काम आती है कहीं ऐसा तो नहीं कोई वैध यहाँ आया हो और उसने धन चोरी किया हो|

अगले दिन बीरबल ने दरबार में आकर अकबर को सारी बात बताई| अकबर ने पूरे दरबार में बैठे लोगों से पूछा कि अभी हाल ही में कौन कौन बीमार था जिसे दवाई की जरुरत पड़ी हो|

एक दरबारी ने उठकर कहा कि महाराज मेरे पेट में काफी दिनों से कब्ज थी मैं वैध प्रसाद के पास गया और उसने मुझे 2 दिन की दवाई दी जिससे मैं पूरी तरह ठीक हो गया|

बीरबल ने तुरंत आदेश दिया कि बैध प्रसाद को बुलाया जाए|

अकबर बोले कि बीरबल माली के पैसे चोरी होने का वैध से क्या सम्बन्ध है ? हमारी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन तुम कहते हो तो आगे की कार्यवाई जारी रहेगी| वैध प्रसाद को बुलाया जाए |

वैध प्रसाद आया तो बीरबल ने उनसे पूछा कि वैध जी मेरे पेट में कब्ज है मुझे कोई दवाई बताइये| वैध बोला आप चिंता ना कीजिये मैं ऐसी दवाई दूंगा कि 2 दिन में आपकी ये समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी|

बीरबल ने पूछा कि लेकिन आप ये दवाई बनाते कैसे हैं ? वैध ने बताया कि सरकार यह दवाई मैं कटहल की जड़ों का अर्क बनाकर बनाता हूँ|

अब बीरबल ने कहा कि दूर दूर तक कहीं कटहल का पेड़ तो है नहीं फिर आप कहाँ से कटहल की जड़ लाये ?

वैध बोला – सरकार, शाही बागों में कटहल का पेड़ है मैंने वहीँ से जड़ें ली थीं| बीरबल बोले तो वैध जी आपको एक मौका दिया जाता है – सच सच बताइये कि माली मीर के पैसे आपने ही लिए हैं ना ?

वैध बुरी तरह डर गया और बोला – माफ़ करें हुजूर मुझे लगा कोई धन दबाकर भूल गया है इसलिए मैंने वो घड़ा ले लिया था मैंने मीर के पैसे वापस कर दूंगा|

बीरबल ने आदेश दिया कि मीर को बुलाया जाये|

मीर आया तो बीरबल ने उसे बताया कि तुम्हारा धन मिल गया है, इसपर मीर बहुत खुश हुआ|

अब बीरबल ने कहा – सुनो मीर तुम्हारा घड़े में कितना धन था, मीर ने कहा – जनाब, 75 सोने के सिक्के थे मेरी जीवनभर की कमाई

बीरबल बोले – ठीक है लेकिन तुम्हें 10 सिक्के कम मिलेंगे ये तुम्हारी मूर्खता की सजा है क्यूंकि धन ऐसी जगह छिपाना मूर्खता ही है
और ये 10 सिक्के वैध को दिए जाएँ जिसने ईमानदारी का परिचय देते हुए धन लौटा दिया|

बादशाह अकबर मंद मंद मुस्कुराते हुए बीरबल को उसकी बुद्धिमानी के लिए शाबाशी दे रहे थे|

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9 Comments

  1. is kahani se hame prena milta hai ki hmae bura samya me nahi ghabrna cahiae jo hota hai acche kliye hota bur waqt sab ka ata hai safhalt a aur ashfhalta ko ek saman samjh na cahiye

  2. अकबर बीरबल की कहानियाँ हमेशा स्वस्थ मनोरंज के साथ साथ शिक्षा प्रद भी होती है. प्रस्तुत कहानी भी उशिका एक उदाहरण है.

  3. बहुत अच्छी कहानी है. ईश्वर जो भी करते है हमारे भले के लिए ही करते है और मैं इस बात में विश्वास करता हु.
    मुझे आपके ब्लॉग के बारे में अभी पता चला और आपका ब्लॉग देख कर बहुत अच्छा लगा. ये ब्लॉग देख कर मैं बहुत खुश हु.

  4. अतिउत्तम ब्लाग। जिन्दगी ( जीवन ) को समझने ।सँवारने के लिये उच्च कोटि लेख , द्रश्टाँत , रोचक ग्यानार्जनात्मक कहानियाँ, ।। कोटि-कोटि धन्यवाद।

  5. Bohat hi kadak or nice stori he yaaro pado to jano aur jano to samjo. padho dil se aur apni life me utaro

  6. Sir if you don’t mind kya main jan sakte hu apke blog ki arage cpc kitni rahti h?
    I hope cpc batane me apko koi problem nhi hogi…
    thanks 🙂

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