माँ पर कविता Beautiful Poem on Mother in Hindi Language

Heart Touching Poem on Mother in Hindi

आज मेरा फिर से मुस्कुराने का मन किया।
माँ की ऊँगली पकड़कर घूमने जाने का मन किया॥

उंगलियाँ पकड़कर माँ ने मेरी मुझे चलना सिखाया है।
खुद गीले में सोकर माँ ने मुझे सूखे बिस्तर पे सुलाया है॥

माँ की गोद में सोने को फिर से जी चाहता है।
हाथो से माँ के खाना खाने का जी चाहता है॥
लगाकर सीने से माँ ने मेरी मुझको दूध पिलाया है।

रोने और चिल्लाने पर बड़े प्यार से चुप कराया है॥
मेरी तकलीफ में मुझ से ज्यादा मेरी माँ ही रोयी है।

खिला-पिला के मुझको माँ मेरी, कभी भूखे पेट भी सोयी है॥

कभी खिलौनों से खिलाया है, कभी आँचल में छुपाया है।
गलतियाँ करने पर भी माँ ने मुझे हमेशा प्यार से समझाया है॥

माँ के चरणो में मुझको जन्नत नजर आती है।
लेकिन माँ मेरी मुझको हमेशा अपने सीने से लगाती है॥

मेरी माँ (कविता)

चुपके चुपके मन ही मन में
खुद को रोते देख रहा हूँ
बेबस होके अपनी माँ को
बूढ़ा होता देख रहा हूँ

रचा है बचपन की आँखों में
खिला खिला सा माँ का रूप
जैसे जाड़े के मौसम में
नरम गरम मखमल सी धूप
धीरे धीरे सपनों के इस
रूप को खोते देख रहा हूँ

बेबस होके अपनी माँ को
बूढ़ा होता देख रहा हूँ………

छूट छूट गया है धीरे धीरे
माँ के हाथ का खाना भी
छीन लिया है वक्त ने उसकी
बातों भरा खजाना भी
घर की मालकिन को
घर के कोने में सोते देख रहा हूँ

चुपके चुपके मन ही मन में
खुद को रोते देख रहा हूँ………
बेबस होके अपनी माँ को
बूढ़ा होता देख रहा हूँ…..

माँ पर ये कविता दिल को छूती है, इस कविता की एक एक लाइन भावुक कर देने वाली है| आप सभी लोगों को यह कविता कैसी लगी ? कमेंट करके जरूर बताएं

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