Indian Blade Runner – Physically Challenged Success Story Major Devender Pal Singh
विकलांगता से शिखर तक – Physically Challenged Success Story
साहस इंसान की वह शक्ति है जिसके आगे विशाल पर्वत भी बौना साबित होता है। अगर इंसान में हिम्मत और आगे बढ़ने की ललक हो तो भाग्य की रेखाएं भी बदल जाती हैं। हम बात कर रहे हैं मेजर देवेन्द्र पाल सिंह की जिन्होंने अपनी हिम्मत और लगन से अपनी किस्मत को पलटने पर मजबूर कर दिया।
कारगिल की लड़ाई के दौरान मेजर एक बम से बुरी तरह घायल हो गए और अपना एक पैर गँवा दिया यहाँ तक कि आर्मी सर्जन ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था लेकिन 25 साल के मेजर को इतना जल्दी मौत से नहीं हारने वाले थे।
आज दुनियाँ इन्हें “Indian Blade Runner” के नाम से जानती है और कोई यकीन नहीं कर सकता कि मेजर करीब 16 साल से मैराथन दौड़ में भाग ले रहे हैं।
आइये आपको मिलाते हैं भारत के पहले Blade Runner(artificial leg) से जिन्होंने अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं माना और असंभव को संभव कर दिखाया। मेजर के अनुसार वो कारगिल लड़ाई के बाद ये उनका दूसरा जीवन है, जब डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे उन्हें बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि कत्रिम टांग से मेजर दोबारा अच्छे चल भी पाएंगे।
लेकिन मेजर ने ठान लिया था कि बिना शीर्ष तक पहुंचे रुकना नहीं है। पूरे 1 साल तक अस्पताल में रहने के बाद मेजर का Blade Runner बनना कोई आसान काम नहीं था।
उसके लिए उनको बहुत संघर्ष करना पड़ा, बहुत दर्द सहना पड़ा लेकिन उनको हारना मंजूर नहीं था। शुरुआत में चलने में भी बहुत दिक्कत होती थी, जब दौड़ना शुरू किया तो बार बार गिरते लेकिन फिर नए जोश के साथ दौड़ लगाते।
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आज 39 साल की उम्र में मेजर करीब 20 मैराथन दौड़ चुके हैं जो अपने आप में विलक्षण उपलब्धि है।
मेजर देवेन्द्र पाल सिंह का कहना है कि अपनी कमियों को अपनी कमजोरी ना बननें दें बल्कि कुछ ऐसा करें कि आपकी कमजोरी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाये
