किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं

Swami-Vivekananda-hindi-sochएक बार की बात है किसी गाँव में एक पंडित रहता था| वैसे तो पंडित जी को वेदों और शास्त्रों का बहुत ज्ञान था लेकिन वह बहुत ग़रीब थे| ना ही रहने के लिए अच्छा घर था और ना ही अच्छे भोजन के लिए पैसे|

एक छोटी सी झोपड़ी थी, उसी में रहते थे और भिक्षा माँगकर जो मिल जाता उसी से अपना जीवन यापन करते थे|

एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे और काफ़ी जगह से फट भी गये थे|

जब उन्होने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया, उसने जब पंडित को फटे चिथड़े कपड़ों में देखा तो उसका मन घ्रणा से भर गया और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया, बोला- पता नहीं कहाँ से गंदा पागल चला आया है|

पंडित दुखी मन से वापस चला आया, जब अपने घर वापस लौट रहा था तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित के फटे कपड़ों पर पड़ी तो उसने दया दिखाई और पंडित को पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए|

अगले दिन पंडित फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गया| व्यक्ति ने नये कपड़ों में पंडित को देखा और हाथ जोड़कर पंडित को अंदर बुलाया और बड़े आदर के साथ थाली में बहुत सारे व्यंजन खाने को दिए| पंडित जी ने एक भी टुकड़ा अपने मुँह में नहीं डाला और सारा खाना धीरे धीरे अपने कपड़ों पर डालने लगे और बोले- ले खा और खा|

व्यक्ति ये सब बड़े आश्चर्य से देख रहा था, आख़िर उसने पूछ ही लिया कि- पंडित जी आप यह क्या कर रहे हैं सारा खाना अपने कपड़ों पर क्यूँ डाल रहे हैं|

पंडित जी ने बहुत शानदार उत्तर दिया- क्यूंकी तुमने ये खाना मुझे नहीं बल्कि इन कपड़ों को दिया है इसीलिए मैं ये खाना इन कपड़ों को ही खिला रहा हूँ, कल जब में गंदे कपड़ों में तुम्हारे घर आया तो तुमने धक्के मारकर घर से निकाल दिया और आज तुमने मुझे साफ और नये कपड़ों में देखकर अच्छा खाना पेश किया| असल में तुमने ये खाना मुझे नहीं, इन कपड़ों को ही दिया है, वह व्यक्ति यह सुनकर बहुत दुखी हुआ|

मित्रों, किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं| अच्छे कपड़े और गहने पहनने से इंसान महान नहीं बनता उसके लिए अच्छे कर्मों की ज़रूरत होती है| यही इस कहानी की प्रेरणा है|

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63 Comments

  1. sab asa nahi sochte ki kisi ki madat ya fir uski kuch sahayta kare aaj ke jamane me log kisi ko kuch nahi karte sab apne matlab ya fir koi jarorat puri karta he

  2. बहुँत ही उम्दा सिख मिली इस कहानी से , सुच हैं की मनुष्य की असली पहचान उसके पहनावे से नहीं बल्कि उसके चरित्र , ज्ञान, और व्यवहार होती हैं |

  3. mulla nasruddin aur indoneshiya ke ek partra kabayaan ki bhi aisi story hai .. jise pandit ki bana ke pesh kiya gaya hai ..pandit kabhi istarike se kam hi rahe hain wo humesha samaj ke sir par bethe hai aur aaj ke mukable pehale zada acchi istithi me rahe hai … kher pandit brahamanwad ko chod diya jaye to kahani bahut acchi hai prerna dayak hai ….. dhanywad

  4. That’s Right is story se hame yahi sekh milti h ki hame kese soch rakhni chahiye kyki ek insan ki soch hi to duniya ko badal sakti h to shuruwat hamse hi ku na ho………

  5. महानता चरित्र पे depends करती है सही बात है लेंकिन हमें अपना पहनावा etc भी ठीक रखना होगा ! सबचीज़ को maintain कर के रखना चाहिए !

    ध्यानवाद

  6. sir
    very very nice story.. but sir personality bhi to mayane rakhti h na sir.. aaj yadi mein dirty cloth pahanta hun, to koi mere paas beitegaa bhi nahi or baat bhi nahi karegaa.. waise aapki baat bilkul sahi h

  7. बहुत अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद आप का .मैंने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किया है. कभी समय मिले तो जरूर मेरा ब्लॉग भी देखे और अपना कीमती सुझाव दे.और उचित लगे तो मेरे भी १-२ ब्लॉग को अपने website पर स्थान दे.

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