म्यूचुअल फंड क्या है ? | म्यूचुअल फंड से पैसे कैसे कमाते हैं ? | Mutual Fund in Hindi

Janiye Kya Hai Mutual Fund in Hindi

(Mutual Fund) म्यूचुअल फंड लोगों के लिए निवेश का एक अच्छा साधन है| भारत में कई लोग कई सालों से म्यूचुअल फंड में निवेश कर के अच्छा पैसा बना रहे हैं, पर भारत में अभी भी कई लोग म्यूचुअल फंड को नहीं जानते हैं| अगर जानते भी है तो उसे शेयर बाजार की तरह जोखिम भरा निवेश का साधन समझते हैं, जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है| इस पोस्ट में हम देखेंगे कि म्यूचुअल फंड वास्तव में है क्या? यह कैसे काम करता है? साथ ही इसके प्रकारों के बारे में बात करेंगे|

इसमें आप कैसे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन निवेश कर सकते हैं| पिछले 20 सालों में म्यूचुअल फंड का कैसा परफॉर्मेंस रहा है, सभी चीजों को हम डिटेल में समझेंगे|

म्यूचुअल फंड क्या है?

म्यूचुअल फंड एक ऐसी फाइनेंस स्कीम है, जिसमें लोगों के द्वारा invest किये गए धन को stocks, bonds, market आदि में निवेश करके धनलाभ कमाया जाता है और investors को उनके द्वारा invest किये गए धन के अनुसार लाभ का हिस्सा दिया जाता है|

म्यूचुअल फंड का अर्थ, इसके नाम में ही छिपा है –

“म्यूचुअल यानि लोगों का तालमेल या समूह और फण्ड यानि पैसा ”

अर्थात म्यूचुअल फंड में कई लोगो के पैसों को इकठ्ठा करके फण्ड की प्रवर्ति के हिसाब से उसको विभिन्न Assets में निवेशित किया जाता है जो कि उस म्यूचुअल फंड के फण्ड मैनेजर द्वारा किया जाता है| बाद में उस निवेशित राशि पर जो रिटर्न बनता है, उसको लोगों के निवेशित राशि के अनुसार निवेशकों में बांटा जाता है|

अगर हम इसको सरल शब्दो में एक उदाहरण के द्वारा समझें तो मान लीजिये, कोई XYZ फण्ड है जिसमें 100 लोगों ने निवेश कर रखा है और कुल निवेशित राशि 1 लाख रुपये है|

अब फण्ड मैनेजर उन 1 लाख रूपए को निवेश करेगा| चूँकि, फण्ड मैनेजर को उस क्षेत्र का काफी अनुभव रहता है, जिससे वो अच्छे रिटर्न प्रदान करने वाले assets में ही पैसे को निवेश करता है| निवेश का क्षेत्र कुछ भी हो सकता है, फण्ड मैनेजर आप के 1 लाख रूपए को सोने में निवेश कर सकता है, सरकारी बांड में निवेश कर सकता है या फिर विभिन्न कंपनियों के शेयर में भी निवेश कर सकता है| आप का निवेश किस क्षेत्र में होगा, ये आप की फण्ड की प्रवर्ति पर निर्भर करेगा|

अब आपके और अन्य लोगों के द्वारा मिलकर जो राशि निवेशित की गई थी, उस 1 लाख की कीमत 2 साल बाद, 1 लाख 50 हजार हो गई, तो अब जो 50 हजार बढ़ गए हैं| वो फण्ड का रिटर्न है, जो कि निवेशकों ने जितनी यूनिट्स उस फण्ड की खरीदी थी, उसके अनुसार मूल + जो रिटर्न बना, वो बढ़ा कर दिया जायेगा|

इस तरह आप का म्यूचुअल फंड काम करता है और आप के लिए अच्छे पैसे कमा कर देता है|

अब आप के मन में एक सवाल आया होगा कि ये यूनिट्स क्या होता है? तो इसको इसी पोस्ट में हम आगे समझेंगे कि म्यूच्यूअल फण्ड में यूनिट्स क्या होती है?

म्यूच्यूअल फण्ड कितने प्रकार के होते हैं ?

जी हाँ अगर आप नए हैं, और आपको जानना आवश्यक है कि म्यूचुअल फंड के प्रकार भी होते हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड भी उनके निवेश के क्षेत्र की प्रवर्ति के अनुसार प्रकार या केटेगरी में बाटे हुए हैं|

जैसे मैंने आप को पहले उदहारण में बताया था कि फण्ड मैनेजर आप के द्वारा निवेशित राशि को गोल्ड में या सरकरी बांड में, अथवा शेयर में निवेश कर सकता है और जिस क्षेत्र में आपके पैसे निवेश होंगे, वो आप का फण्ड उस केटेगरी में आएगा जैसे अगर आपके द्वारा निवेशित पैसा शेयर में निवेश किया जाता है, तो आप के द्वारा निवेशित म्यूचुअल फंड इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड होगा|

वैसे ही अगर गोल्ड में किया जा रहा है तो वो गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड होगा|

इसी प्रकार आप के निवेश के उद्देश्य के आधार पर भी म्यूचुअल फंड का प्रकार होता है जैसे ग्रोथ, टैक्स सेविंग , लिक्विड आदि| तो आइये हम देखते हैं कि म्यूचुअल फंड में कुल कितने प्रकार होते हैं|

निवेश क्षेत्र के आधार पर

निवेश क्षेत्र के आधार पर म्यूचुअल फंड को मुख्य रूप से 4 भागो में बांटा गया है| इक्विटी फंड, डेट फंड, मुद्रा बाजार फंड, हाइब्रिड या बैलेंस्ड फंड्स ये चारों ही प्रकार आपके Assets के निवेश क्षेत्र को दर्शाती हैं –

इक्विटी फंड (Equity Fund)

इक्विटी फंड में आप के द्वारा निवेशित राशि को भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया जाता है जो कि सभी म्यूच्यूअल फण्ड में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला प्रकार है| पर रिटर्न के साथ साथ इसमें रिस्क भी उतना ही है| इस प्रकार के फण्ड में फण्ड मैनेजर द्वारा विभिन्न कंपनियों का अच्छी तरह अध्यन कर के उनके शेयर में पैसे को निवेश किया जाता है|

चूँकि, फण्ड मैनेजर को उस क्षेत्र का अनुभव है, इस कारण आप लम्बे समय में अच्छे ही रिटर्न पाएंगे| इसलिए आप को इक्विटी फण्ड में लम्बे समय के लिए ही निवेश करना चाहिए|

डेट फंड (Date Fund)

ये फण्ड एक ऋण फण्ड होता है अर्थात इस फण्ड में आप के द्वारा निवेशित राशि को सरकारी बांड, कम्पनियों के डिबेंचर्स में निवेश किया जाता है| इसमें आप को कम रिटर्न जरूर मिलता है, पर ये बहुत ही सुरक्षित निवेश साधन है| इसमें आप के द्वारा निवेशित राशि पर बाजार का रिस्क नहीं रहता है|

मुद्रा बाजार फंड (Money Market Fund – MMF)

मुद्रा बाजार फंड में नगद के तुलनात्मक प्रतिभूति में ही आप के द्वारा निवेशित राशि को निवेश किया जाता है| ये एक सुरक्षित फण्ड है इसमें आप को इक्विटी फंड तथा डेट फंड की तुलना में कम रिटर्न मिलता है| मुद्रा बाजार फंड को अल्पकालिक फण्ड के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि आप इसमें कम समय के लिए भी निवेश कर सकते हैं|

हाइब्रिड (Hybrid Fund)

हाइब्रिड को हम बैलेंस फण्ड भी कहते हैं, इसमें आप के द्वारा निवेशित राशि को दो हिस्सों में बता जाता है| एक हिस्से को डेट फंड प्रतिभूति में निवेश किया जाता है, जिससे आप के पैसे पर नियमित और सुरक्षित रिटर्न प्राप्त हो सके तथा दूसरे हिस्से को इक्विटी फंड क्षेत्र में निवेश किया जाता है जिससे आप के निवेश पर ज्यादा तथा अच्छा रिटर्न प्राप्त हो सके|

Investment Objective आधार पर

इन्वेस्टमेंट ओब्जेक्टिव्स के अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड को 8 टाइप में बांटा गया है, जिसके आधार पर आप जान सकते हैं कि आप जिस म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर रहे हैं वो आप को किस प्रकार से रिटर्न प्रदान करेगा और आप किस तरह और कब अपना पैसा वापस चाहते हैं –

ग्रोथ फंड (Growth Fund)

ग्रोथ फंड में निवेशित राशि का अधिकतर भाग औसत रिटर्न देने वाले कंपनियों के शेयर में निवेशित किया जाता है| पर इस निवेश के साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा रहता है अर्थात इस तरह के निवेश में जोखिम थोड़ा अधिक होता है।

इनकम फंड (Income Fund)

इनकम फंड को नियमित इनकम चाहने वाले लोगों के लिए बनाया गया है| इस तरह के फंड में ग्रोथ फंड की तुलना में कम रिस्क होता है, इसमें निवेशित राशि को हाई डिविडेंड जनरेटिंग स्टॉक और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेशित किया जाता है| जिससे एक निश्चित अवधि में निवेशक को डिविडेंड के रूप में इनकम प्राप्त होती रहती है| आप की इनकम मासिक त्रेमासिक या फिर वार्षिक हो सकती है।

लिक्विड फंड (Liquid Fund)

लिक्विड फंड, अन्य योजना की तुलना में बहुत अधिक सुरक्षित निवेश संसाधन है| इसमें आप की निवेशित राशि पर रिस्क कम होता है| क्यूंकि इस तरह के फंड में आप के द्वारा निवेशित राशि को मनी मार्केट और डेट सिक्योरिटीज में निवेश कर दिया जाता है अर्थात आप के पैसे ब्याज के रूप में कंपनियों तथा संस्थानों को दिए जाते हैं| पर इसमें ग्रोथ फंड की तुलना में रिटर्न भी कम होता है।

टैक्स सेविंग फंड (Tax Saving Fund)

टैक्स सेविंग फंड, जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है इसमें आप के द्वारा निवेशित राशि को ऐसे इंस्ट्रूमेंट में निवेशित किया जाता है जो कि इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत इनकम टैक्स छूट की तह में आते हैं| मुख्यतः इस तरह के फंड को इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस) में निवेश किया जाता है इस तरह की स्कीम में आप के द्वारा निवेशित रूपए पर एक समय सीमा का लॉकइन होता है अर्थात आप उस समय में पैसा नहीं निकल सकते हैं| अधिकतर फंड में ये 3 साल का होता है।

अग्रेसिव ग्रोथ फंड (Aggressive Growth Fund)

अग्रेसिव ग्रोथ फंड, अपेक्षाकृत उच्च स्तर का जोखिम के साथ – साथ उच्च रिटर्न देने वाले फंड होते हैं| इन पर मार्केट का पूर्ण रूपेण प्रभाव देखा जाता है| ये ज्यादा जोखिम लेने वाले लोगों के लिए उपयुक्त होते हैं| जो अधिक रिटर्न की कामना करते हैं, इस तरह के फंड में भी स्माल कैप और मिड कैप कंपनियों की इक्विटी में आप के द्वारा निवेशित राशि का निवेश किया जाता है।

कैपिटल प्रोटेक्शन फंड (Capital Protection Fund)

कैपिटल प्रोटेक्शन फंड, ऐसे फंड होते हैं जिसमें आप के द्वारा निवेशित राशि पर जोखिम नहीं रहता अर्थात आप के द्वारा निवेशित राशि कम नहीं होती है| इस तरह के फंड में ऋण प्रतिभूतियों और आंशिक रूप से इक्विटी में निवेश करते हैं| इस फंड का उद्देश्य निवेशकों की पूंजी की रक्षा करना है। डिलीवर किए गए रिटर्न अपेक्षाकृत कम होते हैं और निवेशकों को कम से कम 3 साल के लिए निवेशित रहना चाहिए।

पेंशन फंड (Pension Fund)

पेंशन फंड उन लोगों के लिए है, जो कि रिटायरमेंट के बाद अपनी जरूरतों के लिए पैसे जोड़ रहे हैं| इस तरह के फंड में एक निश्चित अवधि तक निवेश करने के बाद आपके द्वारा किये गए निवेश तथा उस पर मिलने वाले रिटर्न से आप को हर महीने पैसे मिलते रहते हैं जो कि आप जब तक चाहो, तब तक मिलते हैं आप इन पैसों को एक साथ भी निकलवा सकते हैं।

फिक्स्ड मैचोरिटी फंड (Fixed Maturity Fund)

फिक्स्ड मैचोरिटी फंड, में आप के द्वारा निवेशित रूपए को मनी मार्केट, सिक्योरिटीज, बॉन्ड्स में निवेश किया जाता है| ये ऐसे संसाधन होते हैं, जिनमें कुछ समय का लॉकइन होता है अर्थात आप उस समय अंतराल में पैसे नहीं निकल सकते हैं| ये 1 माह से ले कर 5 साल तक का हो सकता है पर इसमें आप के पैसे सुरक्षित तो रहते ही हैं, साथ ही आप को लिक्विड फंड से ज्यादा रिटर्न प्राप्त होता है।

रिस्क प्रोफाइल के आधार पर

रिस्क प्रोफाइल के आधार पर भी हम म्यूच्यूअल फंड को केटेगरी में बांट सकते हैं| जिससे कि अलग-अलग प्रकार के रिस्क प्रोफाइल वाले लोग अपनी रिस्क और रिटर्न के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। रिस्क प्रोफाइल एक आंकड़ा होता है जो कि ये बताता है कि आप कितना रिस्क ले सकते हैं? आप इसे रिस्क प्रोफाइल कैलकुलेटर से कैलकुलेट भी कर सकते हैं –

हाई रिस्क फंड (High Risk Fund)

हाई रिस्क फंड में इक्विटी ग्रोथ तथा इक्विटी अग्रेसिव ग्रोथ फंड आते हैं| जिनमें रिस्क ज्यादा होता है पर रिटर्न भी ज्यादा होते हैं| सामान्यतः इस प्रकार के फंड में आप को लम्बे समय में 12 से 24 प्रतिशत सालाना का रिटर्न प्राप्त हो जाता है, पर ऐसे फंड में आप को कम से कम 5 से 7 साल के निवेश की सलाह दी जाती है और कुछ लोग तो इससे भी ज्यादा समय के लिए निवेश करते हैं।

मध्यम रिस्क फंड (Medium Risk Fund)

मध्यम रिस्क फंड में भी पैसों का निवेश इक्विटी में ही किया जाता है, पर अधिकतर निवेश ब्लू चिप कंपनियों में किया जाता है जोकि अन्य कंपनियों की तुलना में अधिक सुरक्षित होती है| इस तरह के फंड में हाई रिस्क फंड से कम रिस्क होता है पर रिटर्न भी तुलनात्मक कम होता है| इस केटेगरी में आप को 9 से 12 प्रतिशत तक के रिटर्न देखने को मिलते हैं।

लो रिस्क फंड (Low Risk Fund)

लो रिस्क फंड में आर्बिट्राज फंड, अल्ट्रा-शॉर्ट-टर्म फंड्स और लिक्विड फंड्स आते हैं। इसमें आप के पैसे अधिक सुरक्षित रहते हैं, पर इसमें रिटर्न भी कम देखने को मिलता है| इसमें आप को 7 से 9 प्रतिशत तक के रिटर्न देखने को मिलते हैं।

वैरी लो रिस्क फंड (Very Low Risk Fund)

वेरी लौ रिस्क फंड में आप को सबसे कम रिटर्न प्राप्त होता है, पर इस तरह के फंड में रिस्क न के सामान होता है| इसमें आप के द्वारा निवेशित की गई राशि को गोवेर्मेंट बांड तथा सिक्योरिटी में निवेश किया जाता है इसमें आप को लगभग 6 प्रतिशत तक के रिटर्न देखने को मिलते हैं।

म्यूच्यूअल फंड का इतिहास

म्यूच्यूअल फंड के इतिहास, को 5 चरणों में बांटा जा सकता है| जिन्हें हम म्यूच्यूअल फंड की जनरेशन भी कह सकते हैं|

पहला चरण 1963-1987 तक रहा, जिसमें यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (यूटीआई) के गठन के साथ शुरू हुआ था जो कि भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर शुरू किया गया था।

शुरुवाती समय में म्यूच्यूअल फंड को यूनिट स्कीम के नाम से बुलाया गया| 1963 के संसद के अधिनियम यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (यूटीआई) से 1978 तक यूटीआई का इस क्षेत्र पर एक अधिकार रहा|

फिर 1978 में RBI ने यूटीआई के एक अधिकार को तोड़ते हुए, औद्योगिक विकास बैंक ऑफ इंडिया (IDBI) को भी इसमें शामिल किया| 1988 यूटीआई का कुल AUM 6,700 करोड़ रूपए था|

इसके बाद वर्ष 1987-1993 म्यूच्यूअल फंड के दूसरे चरण यानि सेकंड जनरेशन की शुरुआत हुई, इस चरण में म्यूच्यूअल क्षेत्र में सार्वजानिक क्षेत्र के संसथान भी शामिल हुए जिनमें बड़े नाम एसबीआई म्यूचुअल फंड तथा एलआईसी म्यूचुअल फंड, कैनबैंक म्यूचुअल फंड, इंडियन बैंक म्यूचुअल फंड, जीआईसी म्यूचुअल फंड, बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड और पीएनबी म्यूचुअल फंड थे|

इसके बाद 1993-1996 तीसरा चरण यानि थर्ड जनरेशन शुरू हुई, इसमें म्यूच्यूअल फंड क्षेत्र में काफी बढ़ोतरी हुई| भारतीय उद्दमी के साथ मिल कर कई विदेशी कम्पनियां भी इस क्षेत्र में आयीं|

इसके बाद 1996 – 2003 इसका चौथा चरण शुरू हुआ इसमें भारत सरकार ने म्यूच्यूअल फंड नियामक में काफी बदलाव किये तथा इसके लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एम्फी) जैसे बड़े नियामकों का गठन किया, जो कि सभी Assets मैनेजमेंट कंपनियों में एक सरिता रखती है तथा निवेशकों के हितों की रक्षा करती है|

तथा इसके बाद 2004 से आज तक का समय पांचवा चरण कहलाता है, इसमें म्यूच्यूअल फंड ने काफी तरक्की की है| अब लोग इसमें निवेश करने लगे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में बूम आया है, कंपनियों के पास पैसे जुटने लगे हैं और भारतीय बाजार तेजी से तरक्की कर रहा है।

म्यूच्यूअल फंड में निवेश के चरण

म्यूच्यूअल फंड में निवेश से पहले आप को कुछ चरण का पालन करना चाहिए जिससे आप के द्वारा अच्छे म्यूच्यूअल फंड का चुनाव किया जा सके और हमेशा निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर सलाह लें क्योंकि निवेश के मामले में एक अच्छा सलाहकार आप के निवेश को कई गुना बड़ा सकता है| आप निवेश से पहले निम्नलिखित चरणों का पालन करें –

रिस्क प्रोफाइल Analysis

निवेश से पहले आप को हमेशा अपनी रिस्क प्रोफाइल करनी चाहिए| जिससे ये पता चल सके कि आप किस प्रकार के निवेशक हो, जैसे अग्रेसिव निवेशक जो की ज्यादा रिस्क ले सकते हैं, या मॉडरेट निवेशक जो कम रिस्क लेता है, अथवा कंसरवेटिव निवेशक जो की रिस्क नहीं लेना चाहते| इससे यह पता चलता है कि आप को किस प्रकार के फंड में निवेश करना चाहिए –

Goal कैलकुलेशन

हमेसा निवेश Goal के हिसाब से ही करना चाहिए| अगर आप के पास Goal नहीं है तो आप एक अच्छे निवेशक नहीं बन पाएंगे| जैसे आपका Goal हो सकता है कि मुझे 10 साल में 1 करोड़ रूपए का portfolio बनाना है या फिर 15 साल बाद मेरी बेटी की शादी करना है या फिर चाइल्ड एजुकेशन, होम आदि कुछ भी हो सकता है|

आप हमेशा अपना निवेश एसआईपी (SIP) के रूप में करें, क्योंकि एसआईपी आप के निवेश को ज्यादा सुरक्षित बना देती है| अगर आप नहीं जानते कि एसआईपी क्या होती है? तो आगे की पोस्ट में हम आप को इसके बारे में डिटेल में बताएँगे, पर अगर संछिप्त में समझें तो एसआईपी एक नियमित निवेश का सिस्टम होता है|

जिसमें आप हर महीने या फिर 3 महीने या सालाना निवेश की एक frequency बनाते हैं| पर निवेश से पहले आप को अपने एसआईपी रिटर्न के लिए एसआईपी कैलकुलेटर की मदद से अपनी एसआईपी को कैलकुलेट करना होता है| जिससे आप अपना लक्ष्य निर्धारित कर सकें और लक्ष्य के हिसाब से अपनी मासिक प्रीमियम बांध सकें।

निवेश करें

निवेश करने के लिए आप को कई प्लेटफॉर्म मिल जायेंगे, जिनके माध्यम से निवेश कर सकते हैं| जो कि ऑनलाइन या ऑफलाइन हो सकते हैं| सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला माध्यम है – किसी एजेंट या फिर डायरेक्ट AMC हाउस के माध्यम से निवेश करना, जो कि आप के नजदीकी बैंक में मिल जायेगा|

आप अपने नजदीकी बैंक या फिर AMC हाउस जा कर निवेश के लिए फॉर्म भर निवेश कर सकते हैं| आप अगर एजेंट के माध्यम से निवेश कर रहे हैं तो वो आप को रेगुलर फंड देगा पर अगर आप AMC के माध्यम से निवेश कर रहे हैं तो आप उनसे डायरेक्ट फंड में निवेश का बोलें, जिससे आप को सालाना लगभग 0.5 से 1 प्रतिशत का कमीशन की बचत होगी|

अगर आप नहीं जानते कि रेगुलर या डायरेक्ट फंड क्या होते हैं तो हम आपको आने वाली पोस्ट में रेगुलर या डायरेक्ट फंड के बारे में भी बताएँगे और ये भी बताएँगे कि डायरेक्ट फंड और रेगुलर फंड दोनों में क्या अंतर है? और दोनों किस प्रकार से अच्छे या बुरे हैं और आप इनका चुनाव कैसे कर सकते हैं|

आप को ये पोस्ट कैसी लगी? आप कमेंट कर के बता सकते हैं| अगर आपके पास इस पोस्ट से सम्बंधित किसी भी प्रकार के सवाल हों तो आप कमेंट कर के पूछ सकते हैं| हम आप के सवालो के जवाब जरूर देंगे|

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लेखक के बारे में – मैं अमित मीणा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ, मैं कई सालो से फाइनेंसियल प्रोडक्ट पर काम कर रहा हूँ| जिससे फाइनेंस का अच्छा नॉलेज है| मुझे पर्सनल फाइनेंस तथा मनी मैटर्स पर ब्लॉग लिखना अच्छा लगता है| मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को फाइनेंस के क्षेत्र में aware करना चाहता हूँ|

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