Mirza Ghalib Shayari in Hindi ~ मिर्ज़ा ग़ालिब हिंदी उर्दू शायरी
मियां मिर्जा ग़ालिब शायरी
रोने से और इश्क़ में बे-बाक हो गए,
धोए गए हम इतने कि बस पाक हो गए.
धोए गए हम इतने कि बस पाक हो गए.
हमें पता है.तुम. कहीं और के मुसाफिर हो,
हमारा शहर तो.. बस यूँ ही. रास्ते में आया था.
हमारा शहर तो.. बस यूँ ही. रास्ते में आया था.
हम तो फ़ना हो गए उनकी आंखे देखकर ग़ालिब,
ना जाने वो आइना कैसे देखते होंगे.
ना जाने वो आइना कैसे देखते होंगे.
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे
आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक.
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक.
Hindi Ghalib Shayari
दिल-इ-नादान तुझे हुआ क्या है,
आखिर इस दर्द की दवा क्या है.
आखिर इस दर्द की दवा क्या है.
Mirza Ghalib Shayari
मोहब्बत का शील शीला यूँ ही चलता रहेगा,
जिसे दर्द मिला वो सहता रहेगा.
जिसे दर्द मिला वो सहता रहेगा.
Mirza Ghalib Shayari in Hindi
कितना खौफ होता है शाम के अँधेरे में,
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते.
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते.
Ghalib Shayari in Hindi
मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का,
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले.
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले.
Ghalib Shayari on Love in Hindi
पहले आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी,
अब किसी बात पर नहीं आती.
अब किसी बात पर नहीं आती.
Ghalib Shayari on Love
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो,
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो.
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो.
Mirza Ghalib Shayari in Hindi 2 Lines
चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत,
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला.
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला.
Galib Ki Shayari in Hindi
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता,
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता.
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता.
Mirza Ghalib Shayari in Hindi
हमने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला,
होश तब आया जब उस ने कहा के ख़ुदा किसी एक का नहीं होता.
होश तब आया जब उस ने कहा के ख़ुदा किसी एक का नहीं होता.
Ghalib Ki Shayari in Hindi
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता.
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता.
Ghalib Ki Shayari
इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
Ghalib Sher o Shayari
मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब,
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी.
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी.
Ghalib Shayari Collection
चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत,
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला.
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला.
Ghalib Sher in Hindi
दूसरी बार भी होती तो तुम्ही से होती
,
में जो बिलफ़र्ज़ मुहब्बत को दोबारा करता.
में जो बिलफ़र्ज़ मुहब्बत को दोबारा करता.
Best Shayari of Mirza Ghalib in Hindi
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन,
दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है.
दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है.
Mirza Ghalib Sad Shayari in Hindi
क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
Ghalib Shayari on Love in Hindi
छोड़ा न रश्क ने कि तिरे घर का नाम लूँ,
हर इक से पूछता हूँ कि जाऊँ किधर को मैं.
हर इक से पूछता हूँ कि जाऊँ किधर को मैं.
Ghalib Sad Shayari
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.
Shayari of Ghalib on Ishq
क़ासिद* के आते आते ख़त इक और लिख रखूँ,
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में.
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में.
Ghalib Shayari on Life in Hindi
ये महरूमी नहीं ख़ामी ऐ तजली है,
निगाहो में सदाक़त हो तो पर्दा आप उठ जाता है.
निगाहो में सदाक़त हो तो पर्दा आप उठ जाता है.
Mirza Ghalib Love Shayari
आया है बे-कसी-ए-इश्क पे रोना ग़ालिब,
किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद.
किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद.
Mirza Ghalib Shayari in Urdu
बाजीचा-ऐ-अतफाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
Mirza Ghalib Sad Shayari
आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग.
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग.
Mirza Ghalib Ki Shayari
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे.
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे.
Ghalib Shayari on Love in Hindi
ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो
वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले
वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले
Ghalib Shayari in Hindi on Love
दाइम पड़ा हुआ तिरे दर पर नहीं हूँ मैं
ख़ाक ऐसी ज़िंदगी पे कि पत्थर नहीं हूँ मैं
ख़ाक ऐसी ज़िंदगी पे कि पत्थर नहीं हूँ मैं
Mirza Ghalib Ki Shayari in Hindi
बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब,
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है.
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है.
Mirza Ghalib Sher in Hindi
उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़,
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.
Mirza Ghalib Shayari Collection in Hindi
पिला दे ओक से साक़ी जो मुझ से नफ़रत है,
पियाला गर नहीं देता न दे शराब तो दे.
पियाला गर नहीं देता न दे शराब तो दे.
Mirza Ghalib 2 Line Shayari in Hindi
बाजीचा-ऐ-अतफाल है दुनिया मेरे आगे,
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे.
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे.
Ghalib Romantic Shayari
‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे,
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे.
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे.
Ghalib Best Shayari
तेरी वफ़ा से क्या हो तलाफी की दहर में,
तेरे सिवा भी हम पे बहुत से सितम हुए।
तेरे सिवा भी हम पे बहुत से सितम हुए।
Ghalib Ke Sher in Hindi
ज़िंदगी में तो वो महफ़िल से उठा देते थे
देखूँ अब मर गए पर कौन उठाता है मुझे
देखूँ अब मर गए पर कौन उठाता है मुझे
Ghalib Mirza Shayari
खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले
Mirza Ghalib 2 Line Shayari
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे,
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और.
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और.
Mirza Ghalib Romantic Shayari in Hindi
लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है
Mirza Ghalib Love Shayari in Hindi
देख कर मेरा नसीब मेरी तक़दीर रोने लगी,
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी,
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई,
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी.
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी,
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई,
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी.
Mirza Ghalib Shayari on Life in Hindi
देख कर मेरा नसीब मेरी तक़दीर रोने लगी,
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी,
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई,
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी.
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी,
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई,
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी.
Ghalib Sad Shayari Two Lines
फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया
Mirza Ghalib Romantic Shayari
वादे पे वो ऐतबार नहीं करते,
हम जिक्र मोहब्बत सरे बाजार नहीं करते,
डरता है दिल उनकी रुसवाई से,
और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते.
हम जिक्र मोहब्बत सरे बाजार नहीं करते,
डरता है दिल उनकी रुसवाई से,
और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते.
Shayari of Mirza Ghalib
सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है
Shayari of Mirza Ghalib
इस दिल को किसी की आहट की आस रहती है,
निगाह को किसी सूरत की प्यास रहती है,
तेरे बिना जिन्दगी में कोई कमी तो नही,
फिर भी तेरे बिना जिन्दगी उदास रहती है.
निगाह को किसी सूरत की प्यास रहती है,
तेरे बिना जिन्दगी में कोई कमी तो नही,
फिर भी तेरे बिना जिन्दगी उदास रहती है.




