नए विचार Zen Stories in Hindi

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स्वामी विवेकानंद का कहना है कि विचार ही इंसान के चरित्र का निर्माण करते हैं। जैसे आपके विचार होंगे आप वैसे ही बनते चले जायेंगे, आपकी सोच ही आपका दर्पण है। आपको इस दर्पण को साफ़ रखना है तो इस पर जमी धूल को हटाना होगा और वो धूल है हमारे बुरे विचार। जब तक आप अपने बुरे विचारों को नहीं छोड़ेंगे तब तक आप नई, सकारात्मक और अच्छी सोच अपने अंदर नहीं ला सकते।

नोनिन नाम के एक Zen Mater थे। एक बार उनके पास एक बौद्ध विद्यवान आया जो Buddhist पर काफी research और study कर रहा था। वो Zen Master से जेन सिखाने के लिए बोला।

मास्टर उसको कुछ ज्ञान देते इससे पहले ही वो उन्हें अपने बारे में बड़ा चढ़ा कर बातें बताने लगा कि मैं एक प्रोफ़ेसर हूँ, मैंने काफी रिसर्च किया है, मैंने इतनी सारी किताबें पढ़ी हैं और इतना knowledge हासिल किया है।

मास्टर शांति से उसकी बात सुनते रहे और फिर वो चाय बनाने चले गए।

जब चाय बनकर तैयार हुई तो मास्टर उस विद्वान के कप में चाय डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कप पूरा भर नहीं गया, इसके बाद भी मास्टर नहीं रुके चाय डालते ही रहे और फिर चाय कप से बाहर फैलने लगी। अचानक विद्वान चिल्लाया- रुकिए, रुकिए कप पूरा भर चूका है अब आप और उसमें नहीं डाल सकते।

मास्टर हँसते हुए बोले कि तुम इस कप की तरह ही हो, तुम अपने खुद के विचारों से भरे हुए हो फिर मैं कैसे तुम्हें जेन सिखाऊँ? पहले अपने मन रूपी कप को खाली करो फिर शिक्षा लेने आना।

मित्रों हमारा मन रूपी कप भी उसी तरह अपने स्वयं के विचारों से भर चुका है।

आप नयी सकारात्मक चीज़ें नहीं सीख पाते हैं क्यूंकि आपका कप भरा है आपको उसे खाली करना है जिससे कि आप अच्छी चीज़ें सीख पाएं। तो आज उस कप को खाली कर लीजिये, मन के दर्पण को साफ़ कर लीजिये और नयी उमंग और नयी सोच के साथ आगे बढ़िए, आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता|

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7 Comments

  1. very nice story. It is very correct we cannot learn any thing if we don’t have the receptive brain and we can have receptive brain only when we stop to pose that we know everything.

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