अनमोल हिंदी कहानियां – क्या आप भी भिखारी हैं?

अनमोल हिंदी कहानियां

किसी दूर राज्य में एक राजा शासन करता था। राजा बड़ा ही परोपकारी स्वभाव का था, प्रजा का तो भला चाहता ही था। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से भी उसके बड़े अच्छे सम्बन्ध थे। राजा किसी भी इंसान को दुःखी देखता तो उसका ह्रदय द्रवित हो जाता और वो अपनी पूरी श्रद्धा से जनता का भला करने की सोचता।

अनमोल हिंदी कहानियां
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एक दिन राजा का जन्मदिन था। उस दिन राजा सुबह सवेरे उठा तो बड़ा खुश था। राजा अपने सैनिकों के साथ वन में कुछ दूर घूमने निकल पड़ा। आज राजा ने खुद से वादा किया कि मैं आज किसी एक व्यक्ति को खुश और संतुष्ट जरूर करूँगा।

यही सोचकर राजा सड़क से गुजर ही रहा था कि उसे एक भिखारी दिखाई दिया। राजा को भिखारी की दशा देखकर बड़ी दया आई। उसने भिखारी को अपने पास बुलाया और उसे एक सोने का सिक्का दिया। भिखारी सिक्का लेके बड़ा खुश हुआ, अभी आगे चला ही था कि वो सिक्का भिखारी के हाथ से छिटक कर नाली में गिर गया। भिखारी ने तुरंत नाली में हाथ डाला और सिक्का ढूंढने लगा।

राजा को बड़ी दया आई कि ये बेचारा कितना गरीब है, राजा ने भिखारी को बुलाकर एक सोने का सिक्का और दे दिया। अब तो भिखारी की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने सिक्का लिया और जाकर फिर से नाली में हाथ डाल के खोया सिक्का ढूंढने लगा।

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ, उसने फिर भिखारी को बुलाया और उसे एक चांदी का सिक्का और दिया क्यूंकि राजा ने खुद से वादा किया था कि एक इंसान को खुश और संतुष्ट जरूर करेगा। लेकिन ये क्या? चांदी का सिक्का लेकर भी उस भिखारी ने फिर से नाली में हाथ डाल दिया और खोया सिक्का ढूंढने लगा।

राजा को बहुत बुरा लगा उसने फिर भिखारी को बुलाया और उसे एक और सोने का सिक्का दिया। राजा ने कहा – अब तो संतुष्ट हो जाओ….

भिखारी बोला – महाराज, मैं खुश और संतुष्ट तभी हो सकूँगा जब मुझे वो नाली में गिरा सोने का सिक्का मिल जायेगा।

दोस्तों हम भी उस भिखारी की ही तरह हैं और वो राजा हैं भगवान। अब भगवान हमें कुछ भी देदे हम संतुष्ट हो ही नहीं सकते। ये मेरी या आपकी बात नहीं है बल्कि पूरी मानव जाति कभी संतुष्ट नहीं होती। पैसा चाहिए, पैसा मिले तो अब कार चाहिए, कार मिले तो और बड़ी चाहिए और यही क्रम चलता जाता है ………

भगवान ने हमें ये अनमोल शरीर दिया है लेकिन हम जिंदगी भर नाली वाला सोने का सिक्का ही ढूंढते रहते हैं। आप चाहे कितने भी अमीर हो जाओ, चाहे कितना भी धन कमा लो आप संतुष्ट नहीं हो सकते। इस अनमोल पावन शरीर को पाकर भी हम संसार रूपी नाली से सिक्के ही ढूढ़ते रहते हैं। दोस्तों भगवान के दिए इस शरीर रूपी धन का इस्तेमाल दूसरों की मदद के लिए करें, भिखारी ना बनें

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17 Comments

  1. Awesome story bro …thanks for sharing these valuable material…….bro strory me sikhne ko bhut kuch hai…but jitna k muje samj lga vo ye hai ki ……life me jo kho gya uska gam ni krna chahie or jo pas hai usse hamesha hi khush or santusht rehna chahie……..

  2. आपकी कहानी बोहत ही बढ़िया हैं पवन जी, उम्मीद करते हैं आप future मैं ऐसी और कहानियो से हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे|

  3. Nice bahut hi achhi kahani he, waise to mai hindsoch.com ki kahaniya padte rehta hu aur yaha ki kahani nayee, prernadayak aur humanity bhari hoti. Agar vastav me ak bhi kahani ko apni life me amal kare to life hi sudhar jay. Thanks hindisoch.

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