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ईश्वर को ना कोसें Never Complain to God


बहादुर सिंह गाँव के संपन्न किसानों में से एक थे। भरा पूरा घर था, किसी चीज़ की कमी ना थी। कमी थी तो बस एक चीज़ की, भगवान ने जितना दिया उससे कभी खुश नहीं रहते थे। बहादुर सिंह को हमेशा भगवान से यही शिकायत रहती थी कि भगवान ने मेरे लिए कुछ नहीं किया।

मैंने अपनी मेहनत से बड़ी हवेली बनायी है लेकिन भगवान ने मेरे कामों को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मैंने तो जीवन में जो पाया है खुद ही करके पाया है। समय का पहिया तेजी से घूमता गया, बचपन गुजरा, जवानी गयी, अब बहादुर सिंह 80 वर्ष के एक वृद्ध थे। लेकिन अकड़ आज भी वही पुरानी, पैसा था तो अकड़ तो होनी ही थी।

उम्र के साथ शरीर में कमियाँ आने लगीं। बहादुर सिंह को अब अपने कान से बहुत कम सुनाई पड़ता था। बोलो कुछ और वो सुनते कुछ और। नाती, पोते हंसी उड़ाते थे कि बावा को सुनाई नहीं देता – कहो कुछ और, ये सुनते हैं कुछ और।

बहादुर सिंह गुस्से में भरे हुए एक दिन डॉक्टर के यहाँ पहुँचे, और बोले – डॉक्टर बाबू, कान से सुनाई बहुत कम पड़ता है, आप जल्द से जल्द मेरा इलाज कर दीजिये। डॉक्टर ने बहादुर सिंह के कुछ मेडिकल चेकअप कराये, और कुछ दिन बाद उनसे रिपोर्ट ले जाने को कहा।

2 दिन बाद बहादुर सिंह फिर से डॉक्टर के पास अपनी रिपोर्ट लेने गए तो डॉक्टर ने एक रिपोर्ट और एक बिल उनको दिया। बिल में करीब 50 हजार रुपये की रकम लिखी थी। उन दिनों 50 हजार बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। बहादुर सिंह ने डॉक्टर से बिल के बारे में पूछा तो डॉक्टर ने बताया – महाशय, आपकी रिपोर्ट के अनुसार, आपके कान में गंभीर समस्या है और इसके इलाज में 50 हजार रुपये लगेंगे। आप जल्दी ही बिल भर दें तो मैं ऑपरेशन कर दूंगा।

बस इतना सुनते ही बहादुर सिंह की आँखों से आँसू निकल पड़े। डॉक्टर बहादुर सिंह जैसे कड़क इंसान की आँखों में आंसू देख के बोले – क्या हुआ बिल की रकम बहुत ज्यादा है क्या? बहादुर सिंह करूणा से भरे स्वर में बोले – आज मेरी उम्र 80 साल है और मेरा जीवन ज्यादा नहीं बचा है, फिर भी कान ठीक कराने के लिए मुझे 50 हजार रुपयों की जरुरत पड़ी। लेकिन उस ईश्वर ने 80 साल में मुझसे कुछ नहीं माँगा, मैं 80 सालों से इन कानों से सुनता आया हूँ लेकिन ईश्वर ने तो कभी मुझसे कुछ माँगा ही नहीं, और थोड़े से बचे जीवन के लिए मुझे 50 हजार रुपये देने होंगे।

never-complain-to-godकैसी विडंबना है इस अमूल्य शरीर को पाकर भी हम ईश्वर को गाली देते हैं कि मुझे कुछ नहीं दिया। लेकिन ईश्वर कहता है कि मैंने सबको बराबर दिया है, लोग अपने कर्मों से, अपनी बुद्धि से आगे बढ़ते हैं।

मित्रों, आपका शरीर दुनियाँ का सबसे बड़ा धन है। ईश्वर ने आपको जन्म से इस शरीर को देकर धनी बनाया है लेकिन हम हमेशा ईश्वर को कोसते रहते हैं कि हमें ये नहीं मिला या वो नहीं मिला।

आँखों की कीमत उस इंसान से पूछो जिसको दिखाई ना देता हो…..
कान की कीमत उससे पूछो जिसने आज तक कोई शब्द सुना ही ना हो…..
हाथों की कीमत उससे पूछो जो बेचारा हाथ ना होने के कारण ठीक से खा भी नहीं पाता….
पैरों की कीमत उससे पूछो जो बेचारा वैशाखियों पर चलता है…..

सोचिये क्या बीतती होगी ऐसे लोगों पर? कितना आत्मविश्वास डगमगाता होगा ऐसे लोगों का? कितनी बार वो खुद को असहाय महसूस करते होंगे? और एक हम हैं शरीर से धनी होने के बावजूद जीवन भर कुछ नहीं कर पाते बस उस ईश्वर को कोसने में लगे रहते हैं।

आज इस आर्टिकल को पढ़ते हुए आपको मेरे साथ कसम खानी होगी कि आज से कभी भगवान को नहीं कोसेंगे। या तो आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे नहीं तो जो मिला है उसी में खुश रहेंगे। नीचे कमेंट में लिख दीजिये कि मैं भी आज के बाद ईश्वर को नहीं कोसूंगा, और जो मिला है उसमे खुश रहूँगा….. धन्यवाद!!!!!

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17 Comments

  1. SIDDHANT GARG April 22, 2016
  2. MANISH KUMAR April 22, 2016
  3. Ayan khan April 22, 2016
  4. ओमप्रकाश शर्मा April 22, 2016
  5. Pushpendra Kumar Singh May 2, 2016
  6. Ravikumar May 2, 2016
  7. Ravikumar May 2, 2016
  8. Ravikumar May 2, 2016
  9. Ravikumar May 2, 2016
  10. Sagar Kumar May 10, 2016
  11. rahul kumar May 26, 2016
  12. rahul kumar May 26, 2016
  13. Ravindra May 31, 2016
  14. Harish yadav June 17, 2016
  15. Abhi singh July 28, 2016
  16. Bharat Kumar Das August 29, 2016
  17. neelam September 5, 2016