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#Navratri Puja – नवरात्रि का पर्व क्यों मानते हैं ?


नवरात्रि- क्‍या, क्‍यों?

नवरात्रि माँ दुर्गा की पूजा का विशेष त्यौहार है। नौ दिन तक माँ दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। ये शक्ति की पूजा है, वो शक्ति जो हम सबकी पालनहार है। हिन्दू धर्म में ये त्यौहार पूरे देश में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है।

माँ दुर्गा के नौ रूप और नाम

1. शैलपुत्री

शैलपुत्री Shailputri

शैलपुत्री

2. ब्रह्मचारिणी

ब्रह्मचारिणी Brahmcharini

ब्रह्मचारिणी

3. चंद्रघंटा

चंद्रघंटा Maa Chandraghanta

चंद्रघंटा

4. कुष्मांडा

कुष्मांडा Kushmanda

कुष्मांडा

5. स्कंदमाता

स्कंदमाता SkandMata

स्कंदमाता

6. कात्यायनी

कात्यायनी Katyayani Maa

कात्यायनी

7. कालरात्रि

कालरात्रि Kaalratri

कालरात्रि

8. महागौरी

महागौरी Mahagauri

महागौरी

9. सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री Siddhidatr

सिद्धिदात्री

क्यों मानते हैं नवरात्रि का पर्व ?

हमारे यहाँ नवरात्रि के सम्बन्ध में काफी सारी पौराणिक कथायें प्रचलित हैं –

नवरात्री के समय ही माँ दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। महिषासुर ने भगवान शिव की कठोर उपासना करके उनसे कुछ शक्तियां मांग ली थीं। इन्हीं शक्तियों की वजह से स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश भी उसे मारने में सक्षम नहीं थे।

महिषासुर ने सभी देवताओं को भयभीत कर रखा था। इसलिए सभी देवता तब ब्रह्मा विष्णु महेश के पास गए और महिषासुर से मुक्ति की कामना की। तब सभी देवताओं ने अपनी शक्ति को मिलाकर एक नयी शक्ति को जन्म दिया जिसे माँ दुर्गा का नाम दिया गया। माँ दुर्गा के अनेक नाम हैं जिनमें “शक्ति” भी इनका एक नाम है।

माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध करके देवताओं को राक्षसों के प्रकोप से मुक्ति दिलाई। तभी से माँ दुर्गा की पूजा का प्रचलन है।

एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है –

भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान एवं समस्त वानर सेना ने आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक (शारदीय नवरात्रि) माँ दुर्गा की उपासना की थी। इसके बाद दसवें दिन भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई की थी और रावण को मारकर विजय प्राप्त की। इसलिए दसवें दिन दहशरा का पर्व मनाया जाता है जो असत्य पर सत्य एवं अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। नवरात्रि में आदिशक्ति माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। उनके इन रूपों को नवदुर्गा भी कहते हैं।

नवरात्र में कुछ लोगों को खाने पीने की भी दिक्कत होती है क्योंकि इसमें खाने पीने के काफी नियम है और उनका पालन करना पड़ता है। नवरात्र के दिनों में फलाहार, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी पकौड़ी और पूरी खा सकते हैं और अगर बीच में कुछ दिक्कत होती है तो निम्बू पानी, सूखे मेवे अथवा नारियल पानी भी ले सकते है। व्रत के समय केवल शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें।

आइये हम आपको कुछ ऐसी चीजें बताते हैं जिनको आप भूलकर भी ना करें अन्यथा मैया आपके रुष्ट हो सकती हैं

1. नवरात्रि के समय किसी को भी गंदे शब्द नहीं बोलने चाहिए। जो लोग व्रत रख रहे हैं वो किसी के बारे में ना ही गलत सोचें और ना ही अपशब्द कहें इससे मन की पवित्रता का हनन होता है।

2. नवरात्र में खाने में छौंक ना लगायें। सादा और सात्विक भोजन करें इससे मन को शांति मिलती है

3. नौ दिन तक माँस मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें

4. नवरात्र में प्यास और लहसुन ना खायें, ये सब तामसिक माने जाते हैं

5. ऐसा माना जाता है कि नवरात्र में जो लोग पूजा और उपवास करते हैं उनके शरीर में माँ दुर्गा का वास होता है इसलिए नौ दिन तक नाख़ून और बाल नहीं काटने चाहिए।

6. माँ दुर्गा की पूजा के समय चमड़े की चीजें नहीं पहननी चाहिए जैसे चमड़े के जूते, चमड़े की बेल्ट आदि

7. काले रंग के वस्त्र पूजा के समय ना पहनें

आप सबको हिंदीसोच की तरफ से नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें, माँ दुर्गा आपकी और आपके परिवार की रक्षा करें…

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2 Comments

  1. Babita Singh October 2, 2016
  2. Helpnagaruntari October 15, 2016