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परिवर्तन Yes I Can Change in Hindi

Change Yourself to Change the World

विश्वनाथ पूरे गाँव में अकेले पढ़े लिखे educated इंसान थे। एक स्कूल में सरकारी टीचर(Government Teacher) के तौर पे काम करते थे। बच्चों को शिक्षा देते देते एक दिन विचार आया कि क्यों ना कुछ ऐसा किया जाए जिससे दुनियाँ बदल जाये? क्यों ना पूरी दुनियाँ को सुधारा जाये? बस मन में आये इस विचार ने विश्वनाथ को रात भर सोने नहीं दिया।

सुबह उठते ही वो गाँव के सरपँच के पास पहुँचे और बोले कि मैं दुनियाँ बदलना चाहता हूँ। सरपँच उनकी बात सुनकर हँसने लगा- गुरूजी इतना आसान नहीं है दुनियाँ को बदलना, आप ये विचार छोड़ दें तो ही अच्छा है।

लेकिन विश्वनाथ ने ठान लिया था और इसी वजह से वो कई लोगों से मिले पर कोई फायदा नहीं हुआ।

अब वो अकेले ही सामाजिक कार्यों में लग गए लेकिन जल्दी ही ये सच्चाई समझ आ गयी कि दुनियाँ को बदलना इतना आसान नहीं है। तो मन में सोचा- दुनियाँ नहीं बदल सकता तो क्या मैं अपने देश को तो सुधार ही सकता हूँ। बस विश्वनाथ फिर से जुट गए।

समय बीता, बहुत जल्दी ये अहसास हो गया कि देश को बदलना तो बहुत मुश्किल काम है तो सोचा क्यों ना अपने गाँव को सुधारा जाये, अगर मैं अपने गाँव को सुधार पाया तो ये भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी। इसीतरह विश्वनाथ ने अपना जीवन सामाजिक कार्यों में लगा दिया और समय के साथ अब वो बूढ़े हो चले थे। पर गाँव रहा वैसा का वैसा, एक दिन सोचा कि पूरे गाँव को नहीं बदला जा सकता तो क्यों न अपने परिवार को सुधारा जाये।

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समय और बीता, उम्र के साथ जब जीवन का अनुभव हुआ तो विश्वनाथ ने पाया कि एक काम जो सबसे आसान है, वो है खुद को बदलना, उन्हें अहसास हुआ कि काश मैंने खुद को बदला होता तो मेरा असर मेरे परिवार पर पड़ता फिर मेरे परिवार से पड़ोस सुधरता और फिर पड़ोस से पूरा गाँव। इसी तरह पूरा देश भी सुधर सकता था और फिर दुनियाँ को बदलते देर नहीं लगती।

मित्रों, महल कितना बड़ा और विशाल क्यों ना हो लेकिन बनता वो ईंटों से ही है। और इस संसार रूपी महल की ईंटें हम लोग हैं, शिखर भी हम और नींव भी हम। खुद को सुधारिये, सकारात्मक सोच रखिये फिर देखिये दुनियाँ बदलते देर नहीं लगेगी|

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19 Comments

  1. Kushagra singh
  2. nancy gupta
  3. Himanshu raj